प्राधिकृत पाठ केन्द्रीय विधि अधिनियम

प्राधिकृत पाठ केन्द्रीय विधि अधिनियम 1973 Authoritative Texts Central Laws Act 1973

[प्राधिकृत पाठ] (केन्द्रीय विधि) अधिनियम, 1973 1973 का अधिनियम संख्यांक 50) [5 दिसम्बर, 1973] कुछ भाषाओं में केन्द्रीय विधियों के प्राधिकृत अनुवाद के लिए उपबन्ध करने के लिए अधिनियम

                भारत गणराज्य के चौबीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम [प्राधिकृत पाठ] (केन्द्रीय विधि) अधिनियम, 1973 है ।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. कुछ भाषाओं में केन्द्रीय विधि के प्राधिकृत अनुवाद-संविधान की अष्टम् अनुसूची में विनिर्दिष्ट (हिन्दी से भिन्न) किसी भाषा में राष्ट्रपति के प्राधिकार से राजपत्र में प्रकाशित: –

(क) किसी केन्द्रीय अधिनियम या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किसी अध्यादेश का, या 

(ख) संविधान या किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन जारी किए गए किसी आदेश, नियम, विनियम या उपविधि का,

अनुवाद उस भाषा में उसका [प्राधिकृत पाठ] समझा जाएगा । 

3. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है । 

(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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