निर्वाचन आयोग निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार अधिनियम

निर्वाचन आयोग निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार अधिनियम

भारत गणराज्य के इकतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम 1[निर्वाचन आयोग (निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार)] अधिनियम, 1991 है । 

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) मुख्य निर्वाचन आयुक्त” से संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन नियुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त अभिप्रेत है ; 

 [(ख) निर्वाचन आयोग” से संविधान के अनुच्छेद 324 में निर्दिष्ट निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है ;]

 [(ग)] निर्वाचन आयुक्त” से संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन नियुक्त कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त अभिप्रेत है ।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों का वेतन और सेवा की अन्य शर्तें

3. वेतन– । । । मुख्य निर्वाचन आयुक्त [और अन्य निर्वाचन आयुक्त] को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाएगा । 

परन्तु यदि कोई व्यक्ति, यथास्थिति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख के ठीक पूर्व संघ की सरकार के अधीन या किसी राज्य की सरकार के अधीन, किसी पूर्ववर्ती सेवा की बाबत (निःशक्तता या क्षति पेंशन से भिन्न) कोई पेंशन प्राप्त कर रहा था, या, प्राप्त करने के लिए पात्र होते हुए उसने ऐसी पेंशन लेने का निश्चय किया था, तो, यथास्थिति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में सेवा की बाबत उसके वेतन में से निम्नलिखित को घटा दिया जाएगा, अर्थात् :-

(क) उस पेंशन की रकम; और

(ख) यदि पद ग्रहण करने के पूर्व उसने ऐसी पूर्ववर्ती सेवा की बाबत उसे देय पेंशन के, किसी भाग के बदले में उसका संराशीकृत मूल्य प्राप्त किया था तो पेंशन के उस भाग की रकम । 

4. पदावधि-मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त उस तारीख से जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, छह वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा: 

 [परंतु जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्त छह वर्ष की उक्त अवधि के अवसान के पूर्व, पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करता है वहां वह ऐसा पद उस तारीख को रिक्त कर देगा जिसको वह उक्त आयु प्राप्त कर लेता है:]

परन्तु यह और कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त, किसी भी समय राष्ट्रपति को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा । 

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त की बाबत, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व पद धारण कर रहा हो, छह वर्ष की अवधि उस तारीख से संगणित की जाएगी, जिसको उसने पद ग्रहण किया था ।

5. छुट्टी-(1) किसी व्यक्ति को, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख के ठीक पूर्व सरकार की सेवा में था, उसकी पदावधि के दौरान, न कि उसके पश्चात्, उन नियमों के अनुसार छुट्टी मंजूर की जा सकेगी, जो उस सेवा को तत्समय लागू हों, जिसमें वह ऐसी तारीख के पूर्व था और धारा 6 में किसी बात के होते हुए भी वह ऐसी तारीख को अपने नाम जमा छुट्टी को अग्रनीत करने का हकदार होगा ।

(2) किसी अन्य व्यक्ति को, जिसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है, ऐसे नियमों के अनुसार छुट्टी मंजूर की जा सकेगी जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के किसी सदस्य को तत्समय लागू हैं ।

(3) मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त को छुट्टी मंजूर करने या नामंजूर करने और उसे मंजूर की गई छुट्टी को प्रतिसंहृत या कम करने की शक्ति, राष्ट्रपति में निहित होगी ।

6. निर्वाचन आयुक्तों को संदेय पेंशन-(1) किसी व्यक्ति के बारे में, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख के ठीक पूर्व सरकार की सेवा में था, यह समझा जाएगा कि वह उस सेवा से उस तारीख को सेवानिवृत्त हो गया है जिसको वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करता है, किन्तु मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में उसकी पश्चात्वर्ती वह सेवा चालू रहने वाली अनुमोदित सेवा मानी जाएगी जिसे उस सेवा में पेंशन के लिए गणना में लिया जाएगा, जिसमें वह था ।

(2) जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त [या कोई निर्वाचन आयुक्त] [चाहे  [उपधारा (3)] में विनिर्दिष्ट किसी रीति से या त्यागपत्र द्वारा] पद छोड़ता है वहां वह, इस प्रकार पद छोड़ने पर,- 

(क) ऐसी पेंशन का हकदार होगा जो समय-समय पर यथासंशोधित उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1958 (1958 का 41) की अनुसूची के भाग 3 के उपबंधों के अनुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को संदेय पेंशन के बराबर है; और 

(ख) ऐसी पेंशन (जिसके अन्तर्गत पेंशन का संराशीकरण भी है), कुटुम्ब पेंशन और उपदान का हकदार होगा जो समय-समय पर यथासंशोधित उक्त अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अनुज्ञेय हैं । 

 [(3)] उस दशा के सिवाय जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त त्यागपत्र द्वारा पर छोड़ता है, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए यह तभी समझा जाएगा कि उसने अपना पद छोड़ दिया है जब-

(क) उसने धारा 4 में विनिर्दिष्ट पदावधि पूरी कर ली है, या

(ख) उसने, 3[पैंसठ वर्ष] की आयु प्राप्त कर ली है, या

(ग) चिकित्सक द्वारा यह प्रमाणित कर दिया जाता है कि उसका पद छोड़ना उसकी अस्वस्थता के कारण आवश्यक है ।

7. साधारण भविष्य निधि में अभिदाय करने का अधिकार-मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति साधारण भविष्य निधि (केन्द्रीय सेवा) में अभिदाय करने का हकदार होगा । 

8. सेवा की अन्य शर्तें-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, यात्रा भत्ता, किरायामुक्त मकान की सुविधा और ऐसे किरायामुक्त मकान के मूल्य पर आय-कर के संदाय से छूट, सवारी सुविधा, सत्कार भत्ता, चिकित्सा सुविधा से संबंधित सेवा की शर्तें और सेवा की ऐसी अन्य शर्तें,  [जो तत्समय, उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (सेवा शर्त) अधिनियम, 1958 (1958 का 41) के अध्याय 4 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को लागू होती हैं, जहां तक हो सके, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को लागू होंगी ।]

निर्वाचन आयोग के कारबार का संव्यवहार

9. निर्वाचन आयोग के कारबार का संव्यवहार-निर्वाचन आयोग के कारबार का संव्यवहार, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।

10. निर्वाचन आयोग द्वारा कारबार का निपटाया जाना-(1) निर्वाचन, आयोग, अपने कारबार के संव्यवहार की प्रक्रिया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच अपने कारबार के आबंटन को सर्वसम्मत विनिश्चय द्वारा, विनियमित कर सकेगा । 

(2) उपधारा (1) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, निर्वाचन आयोग के सभी कारबार का संव्यवहार यथासंभव, सर्वसम्मति से किया जाएगा । 

(3) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की राय में किसी विषय पर मतभेद है तो ऐसे विषय का विनिश्चय बहुमत के अनुसार किया जाएगा ।]

Note : सभी तरह के एक्ट देखने और समझकर सरल माध्यम से समझाने लिए IPC का सहारा लिया गया है और आप भी भारतीय न्याय व्यवस्था में अपना भरोसा बनाकर इन्हें पढ़े और ज्यादा बेहतर समझ के लिए किसी अच्छे वकील से संपर्क करें. यदि आपको कोई त्रुटी मिले तो comment करके हमें बताये हम जुरूर सुधारने का प्रयास करेंगे. आर्टिकल या पोस्ट में लिखी किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *