मेट्रो रेल प्रचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002

मेट्रो रेल प्रचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002

[मेट्रो रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अधिनियम, 2002]

(2002 का अधिनियम संख्यांक 60)

[17 दिसम्बर, 2002]

दिल्ली महानगर में मेट्रो रेल के प्रचालन और अनुरक्षण

तथा उसके कार्यकरण को विनियमित करने

तथा उससे संसक्त और उसके

आनुषंगिक विषयों का

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-1[(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मेट्रो रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अधिनियम, 2002 है ।

(2) इसका विस्तार, सर्वप्रथम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर है और केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, राज्य सरकार से परामर्श करने के पश्चात् इस अधिनियम को कलकत्ता महानगर के सिवाय, ऐसे अन्य महानगर क्षेत्र और महानगर को, और ऐसी तारीख से, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विस्तारित कर सकेगी और तदुपरि इस अधिनियम के उपबंध उस महानगर क्षेत्र या महानगर को तद्नुसार लागू होंगे ।]

(3) यह 29 अक्तूबर, 2002 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, –

 [(क) तकनीकी योजना और मेट्रो रेल की सुरक्षा के संबंध में, केन्द्रीय सरकार” से रेल से संबंधित भारत सरकार का मंत्रालय अभिप्रेत है;

(कक) दावा आयुक्त” से धारा 48 के अधीन नियुक्त कोई दावा आयुक्त अभिप्रेत है;]

(ख) आयुक्त” से धारा 7 के अधीन नियुक्त मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त अभिप्रेत है;

(ग) विकास” से उसके व्याकरणिक रूपभेदों सहित निर्माण, इंजीनियरी, खनन या ऐसी किसी अन्य संक्रिया का किया जाना अभिप्रेत है जो भूमि में या भूमि पर, भूमि के ऊपर या भूमि के नीचे की जाती है अथवा किसी भवन या भूमि में कोई महत्वपूर्ण तब्दीली करना या भूमि पर कोई पेड़ लगाना है और इसके अंतर्गत पुनर्विकास भी है;

(घ) विद्युत प्रदाय लाइन” का वही अर्थ होगा जो भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) की धारा 2 के खंड (च) में है;

(ङ) यात्री किराया” से यात्रियों के वहन के लिए उद्गृहीत प्रभार अभिप्रेत है;

(च) सरकारी मेट्रो रेल” से केंद्रीय सरकार के स्वामित्व की कोई मेट्रो रेल अभिप्रेत है;

(छ) भूमि” के अंतर्गत किसी भूमि में कोई अधिकार और हित भी है;

 [(ज) महानगर क्षेत्र” का वही अर्थ है जो संविधान के अनुच्छेद 243त के खंड (ग) में है;

(जक) महानगर” से मुम्बई, कलकत्ता, दिल्ली या मद्रास महानगर अभिप्रेत है;]

(झ) मेट्रो रेल” से यात्रियों के वहन के लिए रेल संचालित सार्वजनिक तीव्र अभिवहन प्रणाली अभिप्रेत है जिसका इस्पात के पहिए या रबर लगे टायर पहियों के डिब्बों के साथ समर्पित मार्गाधिकार हो, किंतु इसके अंतर्गत ट्राम-वे नहीं है, और इसके अंतर्गत, –

(अ) वह संपूर्ण भूमि, जो मेट्रो रेल से अनुलग्न भूमि की सीमाओं को दर्शित करने वाले सीमाचिह्नों के अंतर्गत है,

(आ) रेल की सभी लाइनें, साइडिंग, यार्ड या शाखाएं, जिन पर मेट्रो रेल के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में काम किया गया है,

(इ) मेट्रो रेल के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में सन्निर्मित सभी स्टेशन, कार्यालय, संवातन शैफ्ट और वाहिनी, भांडागार, कर्मशालाएं, विनिर्माण शालाएं, स्थिर संयंत्र और मशीनरी, शेड, डिपो और अन्य संकर्म, भी आते हैं; 

(ञ) मेट्रो रेल प्रशासन” से, –

(i) सरकारी मेट्रो रेल के संबंध में, उस रेल का महाप्रबंधक; या

(ii) किसी गैर-सरकारी मेट्रो रेल के संबंध में, वह व्यक्ति, जो किसी मेट्रो रेल का स्वामी या पट्टाधारी है या वह व्यक्ति, जो उस मेट्रो रेल के स्वामी या पट्टाधारी के साथ किसी करार के अधीन उस मेट्रो रेल को चला रहा है, अभिप्रेत है;

(ट) मेट्रो रेल पदधारी” से किसी मेट्रो रेल सेवा के संबंध में, केंद्रीय सरकार द्वारा या मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा नियोजित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

 [(टक) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र” से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम, 1985 (1985 का 2) की धारा 2 के खंड (च) में यथापरिभाषित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अभिप्रेत है;]

(ठ) गैर-सरकारी मेट्रो रेल” से सरकारी मेट्रो रेल से भिन्न कोई मेट्रो रेल अभिप्रेत है;

(ड) अधिसूचना” से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(ढ) पास” से किसी व्यक्ति को मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा या उस प्रशासन द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी द्वारा दिया गया प्राधिकार अभिप्रेत है जो उसको मेट्रो रेल पर यात्री के रूप में यात्रा करने के लिए अनुज्ञात करता है, किंतु इसके अंतर्गत कोई टिकट नहीं है;

(ण) विहित” से इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(त) रेल” का वही अर्थ होगा जो रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24) की धारा 2 के खंड (31) में उसका है;

(थ) विनियम” से इस अधिनियम के अधीन सरकारी मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

(द) चल स्टाक” के अंतर्गत मेट्रो रेल पर चलने वाले या चलने के लिए आशयित रेल इंजन, सवारी डिब्बे (चाहे शक्तियुक्त हों या न हों), वैगन, ट्रालियां और सभी प्रकार के यान भी हैं;

(ध) तार लाइन” का वही अर्थ होगा जो भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1885 का 13) की धारा 3 के खंड (4) में उसका है ।

(2) उन सब शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु भूमिगत रेल (संकर्म-सन्निर्माण) अधिनियम, 1978 (1978 का 33) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।

अध्याय 2

सरकारी मेट्रो रेल प्रशासन

3. सरकारी मेट्रो रेल का गठन-(1) केंद्रीय सरकार, दिल्ली महानगर में किसी सरकारी मेट्रो रेल के दक्ष प्रशासन के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, ऐसी रेल का गठन कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

(2) कोई सरकारी मेट्रो रेल प्रशासन, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए, ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को, जिन्हें वह आवश्यक समझे, सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर नियुक्त कर सकेगा, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

4. महाप्रबंधक की नियुक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी व्यक्ति को किसी सरकारी मेट्रो रेल का महाप्रबंधक नियुक्त करेगी ।

(2) किसी सरकारी मेट्रो रेल का साधारण अधीक्षण और नियंत्रण महाप्रबंधक में निहित होगा ।

अध्याय 3

मेट्रो रेल प्रशासन के कृत्य और शक्तियां

5. मेट्रो रेल प्रशासन के कृत्य-मेट्रो रेल प्रशासन के कृत्य निम्नलिखित होंगे, –

(क) यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए दिल्ली महानगर में किसी भूमि, भवन, पथ, सड़क या रास्ते में, उस पर, उसके आर-पार या उसके नीचे या उसके ऊपर सन्निर्मित मेट्रो रेल का अनुरक्षण और प्रचालन करना;

(ख) दिल्ली महानगर में, मेट्रो रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के प्रयोजन के लिए ऐसे अन्य क्रियाकलापों में लगना या ऐसे अन्य कृत्य करना, जो आवश्यक समझे जाएं ।

6. मेट्रो रेल प्रशासन की शक्तियां-(1) किसी मेट्रो रेल प्रशासन को ऐसी कोई बात करने की शक्ति होगी जो अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों को करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हो ।

(2) पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी शक्ति के अंतर्गत निम्नलिखित शक्ति भी होगी, –

(क) उसके स्वामित्व की, जंगम और स्थावर दोनों, सभी प्रकार की संपत्तियों का अर्जन, धारण और व्ययन करना;

(ख) उसके द्वारा धारित किसी संपत्ति या आस्ति का संवर्धन, विकास या परिवर्तन करना;

[(खक) वाणिज्यिक उपयोग के लिए किसी रेल मेट्रो रेल भूमि का विकास करना;

(खख) एकीकृत परिवहन सेवाओं या किसी अन्य प्रकार के परिवहन द्वारा यात्रियों के वहन की व्यवस्था करना;]

(ग) बाधाओं को दूर करने या किसी स्रोत से आसन्न खतरे का निवारण करने की दृष्टि से, जैसे वृक्ष, पोस्ट या संरचना, जो चल स्टाक या यात्री या चल स्टाक के संचलन के लिए उपबंधित संकेत के अवलोकन को बाधित करती हो, मेट्रो रेल संरेखन से लगी हुई भूमि में या उस पर अस्थायी रूप से प्रवेश करना;

(घ) उसके द्वारा धारित संपत्ति की बाबत किसी पट्टे का निष्पादन या किसी अनुज्ञप्ति को मंजूर करना;

(ङ) कोई संविदा करना या बाध्य करना, उसे समनुदेशित और विखंडित करना;

(च) अपने कृत्यों का निर्वहन करने के लिए किसी अभिकर्ता या ठेकेदार को नियोजित करना;

(छ) तार लाइनों की स्थापना और अनुरक्षण के लिए केन्द्रीय सरकार से अनुज्ञप्ति प्राप्त करना;

(ज) ऊर्जा के प्रवहण और पारेषण के लिए विद्युत प्रदाय लाइनें बिछाना या लगाना और उस प्रयोजन के लिए अनुज्ञप्ति प्राप्त करना; तथा

(झ) ऐसे सभी आनुषंगिक कार्य करना, जो इस अधिनियम द्वारा उसको प्रदत्त या अधिरोपित किसी कृत्य के निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।

अध्याय 4

मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त

7. मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त की नियुक्ति– [(1)] केंद्रीय सरकार, एक या अधिक मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त नियुक्त कर सकेगी ।

 [(2) आयुक्त, रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24) की धारा 5 के अधीन नियुक्त रेल सुरक्षा मुख्य आयुक्त के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा ।]

8. आयुक्त के कर्तव्य-आयुक्त, –

(क) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथापेक्षित किसी मेट्रो रेल का यह अवधारित करने की दृष्टि से कि क्या वह यात्रियों के सार्वजनिक वहन हेतु चालू करने के लिए उपयुक्त है, निरीक्षण करेगा और उस पर रिपोर्ट केंद्रीय सरकार को देगा;

(ख) किसी मेट्रो रेल या उसमें उपयोग में लाए जाने वाले किसी चल स्टाक का ऐसा नियतकालिक, या अन्य निरीक्षण करेगा, जैसा केंद्रीय सरकार निदेश दे;

(ग) किसी मेट्रो रेल पर किसी दुर्घटना के कारणों की इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जांच करेगा; और

(घ) ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको प्रदत्त किए जाएं ।

9. आयुक्तों की शक्तियां-केंद्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, आयुक्त, जब कभी इस अधिनियम के प्रयोजनों में से किसी के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, –

(क) किसी मेट्रो रेल या उसमें उपयोग में लाए जाने वाले किसी चल स्टाक और उसके अन्य संस्थापनों में प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा;

(ख) मेट्रो रेल प्रशासन को संबोधित लिखित आदेश द्वारा अपने समक्ष किसी मेट्रो रेल पदधारी की उपस्थिति की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसे मेट्रो रेल पदधारी या मेट्रो रेल प्रशासन से ऐसी पूछताछ की बाबत, जैसी वह करना ठीक समझे, उत्तरों या विवरणी की अपेक्षा कर सकेगा; और

(ग) किसी मेट्रो रेल प्रशासन की या उसके कब्जे या नियंत्रण में की किसी ऐसी पुस्तक, दस्तावेज या ऐसे सारवान् पदार्थ को प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा, जिसका निरीक्षण करना उसे आवश्यक प्रतीत होता हो ।

10. आयुक्त का लोक सेवक होना-आयुक्त, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।

11. आयुक्तों को दी जाने वाली सुविधाएं-कोई मेट्रो रेल प्रशासन, आयुक्त को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्यों के निर्वहन के लिए या उसको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सभी युक्तियुक्त सुविधाएं देगा ।

 [12. वार्षिक रिपोर्ट-रेल सुरक्षा मुख्य आयुक्त, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान आयुक्तों के क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केंद्रीय सरकार को भेजेगा ।]

13. वार्षिक रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार, [रेल सुरक्षा मुख्य आयुक्त] की वार्षिक रिपोर्ट इसके प्राप्त किए जाने के पश्चात्, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

अध्याय 5

मेट्रो रेल का चालू किया जाना

14. मेट्रो रेल चालू करने की केन्द्रीय सरकार की मंजूरी-यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए दिल्ली महानगर में कोई मेट्रो रेल केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही चालू की जाएगी, अन्यथा नहीं ।

15. किसी मेट्रो रेल को चालू किए जाने की मंजूरी देने से पूर्व औपचारिकताओं का अनुपालन किया जाना-(1) केंद्रीय सरकार, धारा 14 के अधीन किसी मेट्रो रेल के चालू किए जाने की अपनी मंजूरी देने से पूर्व, आयुक्त से यह रिपोर्ट अभिप्राप्त करेगी, कि-

(क) उसने मेट्रो रेल और चल स्टाक का, जिसका उस पर उपयोग किया जा सकता है, सावधानी से निरीक्षण कर लिया है;

(ख) केंद्रीय सरकार ने, जो गतिमान और नियत आयाम अधिकथित किए हैं, उनका अतिलंघन नहीं हुआ है;

(ग) लाइनों की संरचना, पुलों की मजबूती, संकेत देने की प्रणाली के मानक, कर्षण प्रणाली, सिविल संकर्मों का साधारण संरचनात्मक स्वरूप और किसी चल स्टाक के धुरों का आकार और उन पर का अधिकतम कुल भार केंद्रीय सरकार द्वारा अधिकथित अपेक्षाओं के अनुरूप है; और

(घ) उसकी राय में, मेट्रो रेल को, उसका उपयोग करने वाली जनता के लिए बिना किसी खतरे के, यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए चालू किया जा सकता है ।

(2) यदि आयुक्त की यह राय है कि मेट्रो रेल को उसका उपयोग करने वाली जनता के लिए बिना किसी खतरे के चालू नहीं किया जा सकता है तो वह, अपनी रिपोर्ट में इसके आधारों को तथा उन अपेक्षाओं को भी, जिनका उसकी राय में केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूरी दिए जाने से पूर्व अनुपालन किया जाना है अधिकथित करेगा ।

(3) केंद्रीय सरकार, आयुक्त की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात्, धारा 14 के अधीन मेट्रो रेल के उसी रूप में चालू किए जाने की या उन शर्तों के अधीन चालू किए जाने की मंजूरी दे सकेगी, जिनको वह लोक सुरक्षा के लिए आवश्यक समझे ।

16. कुछ संकर्मों के चालू किए जाने के संबंध में धारा 14 और धारा 15 का लागू होना-धारा 14 और धारा 15 के उपबंध निम्नलिखित संकर्मों के चालू किए जाने के संबंध में तब लागू होंगे यदि वे संकर्म यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली मेट्रो रेल के भागरूप हैं या उससे प्रत्यक्षतः संबद्ध हैं और आयुक्त द्वारा धारा 15 के अधीन रिपोर्ट के दिए जाने के पश्चात्, सन्निर्मित किए गए हैं, अर्थात्: –

(क) मेट्रो रेल की अतिरिक्त लाइनों का चालू किया जाना;

(ख) स्टेशनों और जंक्शनों का चालू किया जाना;

(ग) यार्डों को नया रूप देना और पुलों का पुनः निर्माण करना; और

(घ) कोई परिवर्तन या पुनर्निर्माण, जो ऐसे किसी संकर्म के संरचनात्मक स्वरूप पर तात्त्विक रूप से प्रभाव डालता है, जिसको धारा 14 और धारा 15 के उपबंध लागू होते हैं या जिस पर इस धारा द्वारा उनका विस्तार किया गया है ।

17. यातायात का अस्थायी निलंबन-जब किसी मेट्रो रेल पर कोई ऐसी दुर्घटना हो गई है जिसके परिणामस्वरूप यातायात अस्थायी तौर से रुक गया है और या तो मेट्रो रेल की मूल लाइनें और संकर्म अपने मूल स्तर तक पुनःस्थापित कर दिए गए हैं या संचार के पुनःस्थापन के प्रयोजन के लिए कोई अस्थायी पथान्तर बना दिया गया है तब, यथास्थिति, ऐसी पुनःस्थापित रेल की मूल लाईनों और संकर्म या अस्थायी पथान्तर को आयुक्त के पूर्व निरीक्षण के बिना, यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए निम्नलिखित शर्तों के अधीन चालू किया जा सकेगा, अर्थात्ः-

(क) दुर्घटना के कारण हाथ में लिए गए संकर्मों के भारसाधक मेट्रो रेल पदधारी ने लिखित रूप में यह प्रमाणित कर दिया है कि पुनःस्थापित रेलों की लाइनों और संकर्मों के, या अस्थायी पथान्तर के, चालू किए जाने से उसकी राय में, जनता के लिए कोई खतरा उत्पन्न नहीं होगा; और

(ख) रेल की लाइनों और संकर्मों के या पथान्तर के चालू किए जाने की सूचना आयुक्त को तुरंत भेजी जाएगी ।

18. यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए चालू की गई मेट्रो रेल को बंद करने की शक्ति-जहां यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए चालू की गई और उपयोग में लाई गई किसी मेट्रो रेल का या उस पर उपयोग किए जाने वाले किसी चल स्टाक का निरीक्षण करने के पश्चात्, आयुक्त की यह राय है कि उस मेट्रो रेल या किसी चल स्टाक के उपयोग से उसका उपयोग करने वाली जनता के लिए खतरा होगा तो आयुक्त, केंद्रीय सरकार को एक रिपोर्ट भेजेगा, जो उस पर निदेश दे सकेगी कि-

(i) वह मेट्रो रेल यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए बंद कर दी जाए; या

(ii) चल स्टाक का उपयोग बंद कर दिया जाए; या

(iii) उस मेट्रो रेल या चल स्टाक का उपयोग यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए ऐसी शर्तों के अधीन किया जाए, जो केंद्रीय सरकार, लोक सुरक्षा के लिए आवश्यक समझे ।

19. बंद मेट्रो रेल का फिर से चालू किया जाना-जब केंद्रीय सरकार ने, धारा 18 के अधीन किसी मेट्रो रेल के बंद किए जाने का या किसी चल स्टाक के उपयोग को बंद करने का निदेश दिया है तो-

(क) मेट्रो रेल को यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए तब तक फिर से चालू नहीं किया जाएगा जब तक कि आयुक्त द्वारा उसका निरीक्षण नहीं कर लिया गया हो और फिर से चालू किए जाने के लिए मंजूरी इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार नहीं दे दी गई हो; और

(ख) चल स्टाक का उपयोग तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि आयुक्त द्वारा उसका निरीक्षण नहीं कर लिया गया हो और उसके पुनः उपयोग के लिए मंजूरी इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार नहीं दे दी गई हो ।

20. चल स्टाक का उपयोग-कोई मेट्रो रेल प्रशासन, मेट्रो रेल के प्रचालन और कार्यकरण के लिए ऐसे चल स्टाक का उपयोग कर सकेगा, जो वह आवश्यक समझे:

परंतु ऐसी मेट्रो रेल के किसी भाग में पहले से ही चल रहे चल स्टाक से भिन्न डिजाइन या किस्म के किसी चल स्टाक का उपयोग करने से पूर्व, ऐसे उपयोग के लिए केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी अभिप्राप्त की जाएगी:

परंतु यह और कि केंद्रीय सरकार, कोई ऐसी मंजूरी देने से पूर्व, आयुक्त से यह रिपोर्ट अभिप्राप्त करेगी कि उसने चल स्टाक का सावधानीपूर्वक निरीक्षण कर लिया है और उसकी राय में ऐसे चल स्टाक का उपयोग किया जा सकता है ।

21. शक्तियों का प्रत्यायोजन-केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि धारा 22 के अधीन नियम बनाने की शक्ति को छोड़कर, इस अध्याय के अधीन उसकी शक्तियों और कृत्यों में से किसी का प्रयोग या निर्वहन, ऐसे विषयों के संबंध में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी आयुक्त द्वारा भी किया जा सकेगा ।

22. इस अध्याय के विषयों की बाबत नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: –

(क) यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए मेट्रो रेल के चालू किए जाने के संबंध में मेट्रो रेल प्रशासन और आयुक्त   के कर्तव्य;

(ख) यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए, मेट्रो रेल के चालू किए जाने से पूर्व, किए जाने वाले इंतजाम और अनुपालन की जाने वाली औपचारिकताएं;

(ग) उस ढंग का, जिसमें और उस गति का, जिससे मेट्रो रेल में उपयोग किए जाने वाले चल स्टाक को गतिमान या नोदित किया जाना है, विनियमन; और

(घ) वे मामले, जिनमें और वह सीमा, जिस तक इस अध्याय में उपबंधित प्रक्रिया को छोड़ा जा सकेगा ।

अध्याय 6

मेट्रो रेल का कार्यकरण

23. स्टेशनों पर किराया सारणियों का प्रदर्शन और टिकटों का दिया जाना-(1) प्रत्येक मेट्रो रेल प्रशासन, प्रत्येक स्टेशन पर किसी सहजदृश्य और सुगम स्थान में, [हिंदी, अंग्रेजी और उस राज्य की जिसमें ऐसा स्टेशन अवस्थित है, राजभाषा में], स्टेशन से प्रत्येक ऐसे स्थान के लिए, जिसके लिए टिकट यात्रियों को जारी किए जाते हैं, यात्रा के लिए प्रभार्य किराया सारणी लगाएगा ।

(2) मेट्रो रेल प्रशासन या इस निमित्त प्राधिकृत अभिकर्ता, मेट्रो रेल से यात्रा करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को, किराए का संदाय करने पर, एक टिकट जारी करेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन जारी टिकट, उसकी कीमत, विधिमान्यता की अवधि और अन्य ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, दर्शित करेगा ।

24. पासों और टिकटों का प्रदर्शन और अभ्यर्पण-प्रत्येक यात्री, इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा मांग किए जाने पर अपना पास या टिकट ऐसे मेट्रो रेल पदधारी को यात्रा के दौरान अथवा यात्रा की समाप्ति पर, परीक्षा के लिए प्रस्तुत करेगा और ऐसा टिकट, –

(क) यात्रा की समाप्ति पर यदि टिकट एकल यात्रा के लिए हो; या

(ख) यदि ऐसा टिकट किसी विशिष्ट रकम के लिए जारी किया गया है तो ऐसी रकम की समाप्ति पर, जिसके लिए टिकट जारी किया गया था, अभ्यर्पित करेगा ।

25. पास या टिकट के बिना यात्रा करने का प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति, मेट्रो रेल के किसी सवारी डिब्बे में, जब तक कि उसके पास उचित पास या टिकट न हो, एक यात्री के रूप में यात्रा करने के प्रयोजन के लिए न तो प्रवेश करेगा और न उसमें रहेगा ।

26. माल वहन-(1) कोई व्यक्ति, जब वह मेट्रो रेल में यात्रा कर रहा है, विहित मात्रा और वजन से अनधिक निजी माल असबाब वाले । । । यात्री सामान से भिन्न कोई माल, अपने साथ वहन नहीं करेगा ।

(2) जहां कोई व्यक्ति, उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन में मेट्रो रेल में यात्रा करता है वहां उसे, इस बात के होते हुए भी कि उसके पास ऐसी रेल में किसी यात्रा के लिए विधिमान्य पास या टिकट है, मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा या ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा, जिसे ऐसा मेट्रो रेल पदधारी अपनी सहायता के लिए कहे, रेलगाड़ी में से हटाया जा सकेगा ।

27. संक्रामक या सांसर्गिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का यात्रा करने से प्रतिषेध और उनको हटाने की शक्ति-(1) ऐसे संक्रामक या सांसर्गिक रोगों से, जो विहित किए जाएं, पीड़ित कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल में यात्रा नहीं करेगा ।

(2) यदि कोई व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन में यात्रा करता है तो वह मेट्रो रेल से हटाए जाने का दायी होगा ।

28. यात्रियों और रेलगाड़ी के भारसाधक रेल पदधारी के बीच संचार-मेट्रो रेल प्रशासन, किसी भी मेट्रो रेलगाड़ी में, यात्रियों और रेलगाड़ी के भारसाधक मेट्रो रेल सेवक के बीच संचार के ऐसे दक्ष साधनों की व्यवस्था और उनका अनुरक्षण करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किए जाएं ।

29. मेट्रो रेल या उसके द्वारा अधिभोगित परिसरों पर वाणिज्यिक विज्ञापन प्रदर्शित करने का मेट्रो रेल प्रशासन का अधिकार-मेट्रो रेल प्रशासन, वाणिज्यिक विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए अपने परिसरों, भूमियों, भवनों, पोस्तों, पुलों, संरचनाओं, यानों, चल स्टाकों और अन्य संपत्ति का उपयोग कर सकेगा और इस प्रयोजन के लिए, पोस्टरों या अन्य प्रचार सामग्रियों को प्रदर्शित करने के लिए कोई होर्डिंग्स, बिल, बोर्डस, शो-केसेस और ऐसी अन्य वस्तुएं निर्मित या सन्निर्मित या नियत कर सकेगा ।

30. खतरनाक या घृणोत्पादक सामग्री का वहन-(1) कोई भी व्यक्ति, अपने साथ मेट्रो रेल में ऐसी खतरनाक या घृणोत्पादक सामग्री, जो विहित की जाए, नहीं ले जा सकेगा ।

(2) यदि किसी मेट्रो रेल पदधारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति के पास अपने साथ ले जा रहे किसी रूप में आधान में, या अन्यथा खतरनाक या घृणोत्पादक सामग्री है तो वह उसकी अंतर्वस्तु अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए उसके वाहक द्वारा ऐसे आधान को खुलवा सकेगा ।

(3) कोई मेट्रो रेल सेवक किसी खतरनाक या घृणोत्पादक सामग्री को ले जाने वाले व्यक्ति को मेट्रो रेल से हटा सकेगा ।

31. मेट्रो रेल और उसके वाहकों से व्यक्तियों को हटाने की शक्ति-यदि कोई व्यक्ति, किसी मेट्रो रेल पर या उसके किसी भाग में विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना प्रवेश करेगा और किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा मेट्रो रेल से जाने का कहे जाने पर वहां से नहीं जाएगा तो किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा, जिसे ऐसा मेट्रो रेल पदधारी अपनी सहायता करने के लिए कहे, मेट्रो रेल से हटाया जा सकेगा ।

32. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।

(2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: –

(क) धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन टिकट की विशिष्टियां, जैसे उसका मूल्य, विधिमान्यता की अवधि और अन्य विशिष्टियां;

(ख) धारा 26 की उपधारा (1) के अधीन माल असबाब की मात्रा और वजन;

(ग) धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन वे रोग जो संक्रामक या सांसर्गिक हैं;

(घ) वह सामग्री, जो धारा 30 की उपधारा (1) के अधीन खतरनाक या घृणोत्पादक है; और

(ङ) साधारणतया मेट्रो रेलों में यात्रा का और उसके उपयोग, कार्यकरण और प्रबंध के विनियमन के लिए ।

(3) प्रत्येक मेट्रो रेल प्रशासन, उसके मेट्रो रेल के प्रत्येक स्टेशन पर इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियमों की एक प्रति रखेगा और किसी भी व्यक्ति को उसके निःशुल्क निरीक्षण के लिए भी अनुज्ञात करेगा ।

अध्याय 7

किराया नियतन

33. यात्रियों के वहन के लिए किराए का नियतन-मेट्रो रेल प्रशासन, समय-समय पर, धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन गठित किराया नियतन समिति द्वारा उसे की गई सिफारिशों के आधार पर, यात्रियों के वहन के लिए, मेट्रो रेल के किसी स्टेशन से किसी अन्य स्टेशन तक यात्रा करने के लिए, किराया नियत कर सकेगा:

परंतु मेट्रो रेल प्रशासन, मेट्रो रेल का चालन प्रारंभ करते समय, किराया नियतन समिति की सिफारिशों के बिना भी, इस धारा के अधीन किराया नियत कर सकेगा ।

34. किराया नियतन समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर मेट्रो रेल द्वारा यात्रियों के वहन के लिए किराए की सिफारिश करने के प्रयोजन के लिए, किराया नियतन समिति का गठन कर सकेगी ।

(2) किराया नियतन समिति में एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य होंगे ।

(3) कोई भी व्यक्ति, अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो या रहा हो ।

 [(4) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार प्रत्येक, भाड़ा नियतन समिति में एक-एक सदस्य नामनिर्देशित करेगी:

परंतु ऐसा कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार का अपर सचिव है या रहा है या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार में कोई समतुल्य पद धारण करता है या धारण किया है, सदस्य के रूप में नामनिर्देशित किए जाने के लिए अर्हित होगा ।]

(5) उच्च न्यायालय के किसी आसीन न्यायाधीश को उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के परामर्श के पश्चात् ही नियुक्त किया जाएगा ।

35. अन्य निबंधन और शर्तें तथा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया-(1) किराया नियतन समिति के अन्य निबंधन और शर्तें तथा उस समिति द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए ।

(2) मेट्रो रेल प्रशासन, किराया नियतन समिति को इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सभी युक्तियुक्त सुविधाएं उपलब्ध कराएगा ।

36. सिफारिशें करने की अवधि-किराया नियतन समिति सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट संबद्ध मेट्रो रेल प्रशासन को तीन मास से अनधिक की ऐसी अवधि के भीतर प्रस्तुत करेगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।

37. सिफारिशों का मेट्रो रेल प्रशासन पर आबद्धकारी होना-किराया नियतन समिति द्वारा की गई सिफारिशें, संबद्ध मेट्रो रेल प्रशासन पर आबद्धकारी होंगी ।

अध्याय 8

दुर्घटनाएं

38. मेट्रो रेल दुर्घटना की सूचना-(1) जब किसी मेट्रो रेल के कार्यचालन के अनुक्रम में, निम्नलिखित में से कोई दुर्घटना होती है, अर्थात्:-

(क) ऐसी दुर्घटना, जिसमें किसी मानव जीवन की हानि या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में यथापरिभाषित घोर उपहति कारित होती है; या

(ख) ऐसी रेलगाड़ियों के बीच कोई टक्कर; या

(ग) यात्रियों का वहन करने वाली किसी रेलगाड़ी या ऐसी रेलगाड़ी के किसी भाग का पटरी से उतरना; या

(घ) किसी प्रकार की ऐसी कोई दुर्घटना जिसमें प्रायः मानव जीवन की हानि या यथापूर्वोक्त घोर उपहति होती है; या

(ङ) किसी अन्य प्रकार की ऐसी कोई दुर्घटना, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अधिसूचित करे,

वहां मेट्रो रेल के उस अनुभाग का, जिस पर दुर्घटना हुई है, भारसाधक मेट्रो रेल पदधारी, बिना विलम्ब के दुर्घटना की सूचना ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियों को अंतर्विष्ट करते हुए, जो विहित की जाएं, उस उपायुक्त और पुलिस उपायुक्त को, जिसकी सीमाओं के भीतर दुर्घटना हुई है, उस पुलिस थाने के, जिसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर दुर्घटना हुई है, भारसाधक अधिकारी को या, ऐसे अन्य मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया जाए ।

(2) वह मेट्रो रेल प्रशासन, जिसकी अधिकारिता के भीतर दुर्घटना होती है, बिना विलम्ब के, दुर्घटना की सूचना [राज्य सरकार] को और उस आयुक्त को देगा, जिसकी दुर्घटनास्थल पर अधिकारिता है ।

39. आयुक्त द्वारा जांच-(1) ऐसी कोई दुर्घटना होने की, जिसमें मानव जीवन की हानि या घोर उपहति हुई है जिससे किसी यात्री को स्थायी प्रकृति की पूर्ण या आंशिक निःशक्तता हुई है, सूचना की धारा 38 के अधीन प्राप्ति पर आयुक्त, यथासंभव शीघ्र, उस मेट्रो रेल प्रशासन को जिसकी अधिकारिता के भीतर दुर्घटना हुई है, उन कारणों की, जिनसे दुर्घटना हुई है, जांच करने के अपने आशय को अधिसूचित करेगा और साथ ही जांच की तारीख, समय और स्थान नियत करेगा और संसूचित करेगा:

परंतु आयुक्त किसी ऐसी अन्य दुर्घटना के बारे में भी जांच करने के लिए स्वतंत्र होगा जिसकी ऐसी जांच करना उसकी राय में अपेक्षित है ।

(2) यदि किसी कारणवश आयुक्त दुर्घटना होने के बाद यथाशक्यशीघ्र जांच करने के लिए समर्थ नहीं है तो वह तद्नुसार मेट्रो रेल प्रशासन को अधिसूचित करेगा ।

40. मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा जांच-जहां आयुक्त द्वारा धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन कोई जांच नहीं की जाती है या जहां आयुक्त ने उस धारा की उपधारा (2) के अधीन मेट्रो रेल प्रशासन को यह सूचित कर दिया है कि वह जांच करने के लिए समर्थ नहीं है वहां मेट्रो रेल प्रशासन, जिसकी अधिकारिता के भीतर दुर्घटना हुई है, विहित प्रक्रिया के अनुसार जांच कराएगा ।

41. जांच के संबंध में आयुक्त की शक्तियां-(1) इस अध्याय के अधीन किसी दुर्घटना के कारणों की जांच करने के प्रयोजन के लिए आयुक्त को, धारा 9 में विनिर्दिष्ट शक्तियों के अतिरिक्त निम्नलिखित विषयों के संबंध में ऐसी शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय किसी सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात्: –

(क) व्यक्तियों को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उनकी परीक्षा करना;

(ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और उनके पेश किए जाने की अपेक्षा करना;

(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;

(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतियों की अध्यपेक्षा करना;

(ङ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाए ।

(2) आयुक्त को, इस अध्याय के अधीन जांच करते समय, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और   अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

42. आयुक्त के समक्ष किया गया कथन-आयुक्त के समक्ष किसी जांच में साक्ष्य देने के अनुक्रम में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई कथन, ऐसे व्यक्ति द्वारा मिथ्या साक्ष्य देने के लिए अभियोजन के सिवाय, उसे किसी सिविल या दांडिक कार्यवाही के अध्यधीन नहीं बनाएगा या ऐसी कार्यवाही में उसके विरुद्ध उपयोग में नहीं लाया जाएगा:

परन्तु यह तब जब कि वह कथन-

(क) ऐसे किसी प्रश्न के उत्तर में किया जाता है जिसका उत्तर देने की आयुक्त ने अपेक्षा की है;

(ख) उस जांच की विषय-वस्तु से सुसंगत है ।

43. जांच करने के लिए प्रक्रिया, आदि-इस अध्याय के अधीन जांच करने वाला कोई मेट्रो रेल प्रशासन या आयुक्त, जांच की सूचना ऐसे व्यक्तियों को भेज सकेगा, ऐसी प्रक्रिया का पालन कर सकेगा और रिपोर्ट उस रीति उस रीति में तैयार कर सकेगा, जो विहित की जाए ।

44. यदि जांच आयोग की नियुक्ति की जाती है, तो कोई भी जांच, अन्वेषण आदि नहीं किया जाएगा-इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां दुर्घटना की जांच करने के लिए जांच आयोग अधिनियम, 1952 (1952 का 3) के अधीन जांच आयोग नियुक्त किया जाता है, वहां उस दुर्घटना के संबंध में लंबित कोई जांच, अन्वेषण या अन्य कार्यवाही नहीं की जाएगी, और ऐसी जांच से संबंधित सभी अभिलेख या अन्य दस्तावेज ऐसे प्राधिकारी को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, भेज दिए जाएंगे ।

45. ऐसी दुर्घटना की जांच, जो धारा 38 के अंतर्गत नहीं आती-जहां ऐसी प्रकृति की कोई दुर्घटना, जो धारा 38 में विनिर्दिष्ट नहीं है, मेट्रो रेल के कार्यकरण के अनुक्रम में होती है, वहां वह मेट्रो रेल प्रशासन, जिसकी अधिकारिता के भीतर दुर्घटना हुई है, दुर्घटना के कारणों की ऐसी जांच करा सकेगा जो विहित की जाए ।

46. विवरणियां-प्रत्येक मेट्रो रेल प्रशासन, अपनी रेल पर घटित होने वाली दुर्घटनाओं की एक विवरणी, चाहे उन दुर्घटनाओं में किसी व्यक्ति को क्षति पहुंची हो, अथवा नहीं, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में और ऐसे अंतरालों पर, जो विहित किए जाएं, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

47. इस अध्याय के विषयों की बाबत नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: –

(क) दुर्घटनाओं की सूचना, जो धारा 38 के अधीन दी जानी है, का प्ररूप और दुर्घटना की वे विशिष्टियां जो ऐसी सूचनाओं में होंगी;

(ख) वे व्यक्ति, जिन्हें इस अध्याय के अधीन किसी जांच की बाबत सूचनाएं भेजी जानी हैं, ऐसी जांच में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और वह रीति, जिसमें ऐसी जांच की रिपोर्ट तैयार की जाएगी;

(ग) मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा धारा 40 के अधीन दुर्घटना के कारणों के लिए की जाने वाली जांच की रीति;

(घ) धारा 41 की उपधारा (1) के खंड (ङ) के अधीन जांच करना;

(ङ) धारा 43 के अधीन जांच करने की प्रक्रिया और रिपोर्ट तैयार करना;

(च) धारा 45 के अधीन दुर्घटना के कारणों की जांच करना; और

(छ) मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा धारा 46 के अधीन दुर्घटनाओं की विवरणी भेजने का प्ररूप और रीति ।

अध्याय 9

दावा आयुक्त

48. दावा आयुक्त-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी दुर्घटनाओं की बाबत, जिनमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति या मेट्रो रेल के कार्यकरण से उद्भूत किसी संपत्ति को क्षति अंतर्वलित है, प्रतिकर हेतु दावों का न्यायनिर्णयन करने के प्रयोजन के लिए दावा आयुक्त की नियुक्ति कर सकेगी ।

49. दावा आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं-कोई व्यक्ति, दावा आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह-

(क) उच्चन्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है अथवा बनने के लिए अर्हित है; या

(ख) भारतीय विधिक सेवा का सदस्य रहा है और उसने उस सेवा की श्रेणी 1 में कोई पद धारित किया है; या

(ग) कम से कम तीन वर्ष तक ऐसा सिविल न्यायिक पद धारण किया है जिसका वेतनमान भारत सरकार में संयुक्त सचिव के वेतनमान से कम न हो ।

50. पदावधि-दावा आयुक्त अपना पद ऐसी अवधि तक धारण करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।

51. पदत्याग और हटाया जाना-(1) दावा आयुक्त, केन्द्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्तलेख में सूचना द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ।

(2) दावा आयुक्त को केन्द्रीय सरकार के किसी आदेश द्वारा, ऐसी किसी जांच के पश्चात् जिसमें उसे उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दे दी गई थी और उन आरोपों के संबंध में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया था; साबित अवचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकेगा ।

(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट दावा आयुक्त के अवचार या असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए

52. दावा आयुक्त के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें-दावा आयुक्त को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं:

परन्तु दावा आयुक्त के वेतन और भत्तों में और सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके अहित में परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।

53. दावा आयुक्त की प्रक्रिया और शक्तियां-(1) दावा आयुक्त को, शपथ पर साक्ष्य लेने, साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजों तथा अन्य वस्तुओं के प्रकटन या उन्हें प्रस्तुत करने के लिए विवश करने के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी ।

(2) दावा आयुक्त, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए, सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

(3) दावा आयुक्त, प्रतिकर के संदाय के लिए किसी दावे की जांच करने और उसका निर्धारण करने में, ऐसे किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, ऐसी संक्षिप्त प्रक्रिया का अनुसरण कर सकेगा, जिसे वह ठीक समझे ।

(4) दावा आयुक्त, ऐसे किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, प्रतिकर के किसी दावे का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए, ऐसे किसी एक या अधिक व्यक्तियों की जांच करने में उसकी सहायता करने के लिए चुनाव कर सकेगा, जिनको जांच के सुसंगत किसी विषय पर विशेष ज्ञान हो ।

(5) दावा आयुक्त को ऐसे अंतरिम या अंतिम आदेश, जो परिस्थितियों के अनुसार अपेक्षित हो, जिसके अंतर्गत खर्चों का संदाय करने के लिए आदेश भी हैं, पारित करने की सभी शक्तियां होंगी ।

54. दावा आयुक्त के विनिश्चय-(1) प्रतिकर का संदाय करने के मेट्रो रेल प्रशासन के दायित्व के बारे में या ऐसे व्यक्ति के बारे में, जिसको ऐसा प्रतिकर संदेय है, किसी प्रश्न का अवधारण दावा आयुक्त के आदेश द्वारा किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश अंतिम होगा ।

55. कतिपय अधिकारों की व्यावृत्ति-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे शारीरिक क्षति के कारण इस अधिनियम के अधीन और प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी, प्रतिकर के लिए कोई दावा उद्भूत होता है वहां प्रतिकर के लिए हकदार व्यक्ति, ऐसे प्रतिकर के लिए दावा या तो इस अधिनियम के अधीन या प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन केवल एक बार ही कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) की कोई बात किसी व्यक्ति के, मृत्यु या शारीरिक क्षति के लिए या संपत्ति के नुकसान के लिए या बीमा की किसी पालिसी के अधीन संदेय किसी रकम का उपबंध करने वाली किसी संविदा या स्कीम के अधीन संदेय प्रतिकर का दावा करने के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी ।

56. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: –

(i) धारा 51 की उपधारा (3) के अधीन दावा आयुक्त के अवचार या असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया:

(ii) धारा 52 के अधीन दावा आयुक्त के वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें; और

(iii) इस अध्याय के उद्देश्यों के आनुषंगिक या उनसे संबंधित कोई अन्य प्रयोजन ।

अध्याय 10

दुर्घटनाओं के कारण मेट्रो रेल प्रशासन के दायित्व

57. दायित्व की सीमा-मेट्रो रेल प्रशासन, किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, मृत्यु या शारीरिक क्षति से हुई हानि के लिए उस सीमा तक, जो विहित की जाए, किसी व्यक्ति को प्रतिकर का संदाय करने का दायी होगा ।

58. प्रतिकर के लिए आवेदन-किसी दुर्घटना से उद्भूत प्रतिकर के लिए आवेदन दावा आयुक्त को निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा, –

(क) वह व्यक्ति जिसे क्षति पहुंची है या हानि हुई है; या

(ख) जहां दुर्घटना के परिणामस्वरूप मृत्यु हुई है वहां मृतक के सभी या कोई आश्रित; या

(ग) यथास्थिति, क्षतिग्रस्त व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत अभिकर्ता या मृतक का कोई आश्रित:

परंतु जहां मृतक के सभी आश्रित प्रतिकर के लिए ऐसे आवेदन में सम्मिलित नहीं हुए हैं वहां आवेदन मृतक के सभी आश्रितों की ओर से या उनके फायदे के लिए किया जाएगा और ऐसे आश्रितों को, जो सम्मिलित नहीं हुए हैं, आवेदन के प्रत्यर्थियों के रूप में जोड़ा जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, आश्रित” शब्द का वही अर्थ होगा जो रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24) की धारा 123 के खंड (ख) में उसका है ।

अध्याय 11

अपराध और शास्तियां

59. मेट्रो रेल पर मत्तता या न्यूसेंस-(1) यदि मेट्रो रेल के सवारी डिब्बे में या उसके किसी भाग पर कोई व्यक्ति-

(क) मत्तता की हालत में होगा; या

(ख) कोई न्यूसेंस या बर्बरता कारित करेगा या अशिष्ट कार्य करेगा अथवा गाली-गलौच की या अश्लील भाषा का उपयोग करेगा; या

(ग) जानबूझकर या प्रतिहेतु के बिना किसी यात्री के आराम में किसी प्रकार से बाधा डालेगा,

तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और ऐसे किसी किराए के, जो उसने दिया हो अथवा ऐसे किसी पास या टिकट के, जो उसने प्राप्त या क्रय किया हो, समपहरण का अथवा मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा ऐसे सवारी डिब्बे या भाग से हटाए जाने का भी दायी होगा ।

(2) यदि कोई मेट्रो रेल पदधारी ड्यूटी पर होते हुए मत्तता की हालत में होगा तो वह जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, या जहां ड्यूटी का अनुचित रूप से पालन किए जाने से मेट्रो रेल पर यात्रा करने वाले या उसमें होने वाले किसी यात्री की सुरक्षा को खतरा होना संभाव्य होगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

60. मेट्रो रेल पर घृणोत्पादक माल ले जाने या ले जाना कारित करने के लिए शास्ति-(1) यदि धारा 30 की उपधारा (1) के उल्लंघन में, कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल पर कोई घृणोत्पादक माल ले जाएगा या ले जाना कारित करेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शास्तियों के अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति मेट्रो रेल पर घृणोत्पादक माल ले जाएगा या ले जाना कारित करेगा तो वह किसी ऐसे माल को मेट्रो रेल पर ले जाने के कारण हुई किसी हानि, क्षति या नुकसान के लिए भी उत्तरदायी होगा ।

61. मेट्रो रेल पर खतरनाक माल ले जाने या ले जाना कारित करने के लिए शास्ति(1) यदि धारा 30 की उपधारा (1) के उल्लंघन में, कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल पर कोई खतरनाक माल ले जाएगा या ले जाना कारित करेगा तो वह, कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शास्तियों के अतिरिक्त, मेट्रो रेल पर कोई खतरनाक माल ले जाने या ले जाना कारित करने वाला व्यक्ति, मेट्रो रेल पर ले जाने के कारण हुई किसी हानि, क्षति या नुकसान के लिए भी उत्तरदायी होगा ।

62. मेट्रो रेल पर प्रदर्शनों का प्रतिषेध-(1) मेट्रो रेल के किसी भाग या उसके किसी अन्य परिसर पर किसी भी प्रकार का कोई प्रदर्शन नहीं किया जाएगा और मेट्रो रेल प्रशासन ऐसे परिसर से ऐसे किसी व्यक्ति को, जो ऐसे प्रदर्शनों में भाग ले रहा है, हटा सकेगा, चाहे उसके पास उक्त परिसर में उसे रहने का हकदार बनाने वाला कोई पास या टिकट है या नहीं है ।

(2) कोई भी व्यक्ति, किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना, मेट्रो रेल के किसी कक्ष या सवारी डिब्बे में या उसके किसी परिसर में कोई इश्तहार न तो चिपकाएगा और न ही लगाएगा और न ही कोई बात या विषय लिखेगा या चित्रित करेगा तथा ऐसे किसी व्यक्ति को, जो ऐसा कार्य करते हुए पाया जाएगा, मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा कक्ष, सवारी डिब्बे या परिसर से हटाया जा सकेगा ।

(3) जो कोई, उपधारा (1) या उपधारा (2) के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा या किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा किसी कक्ष, सवारी डिब्बे या परिसर को छोड़ने के लिए कहे जाने पर ऐसा करने से इंकार करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

63. रेलगाड़ी की छत आदि पर यात्रा करने के लिए शास्ति-यदि कोई यात्री, किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा प्रतिविरत रहने की चेतावनी दिए जाने के पश्चात् भी, किसी रेलगाड़ी की छत पर यात्रा करेगा या किसी रेलगाड़ी के ऐसे भाग, जो यात्रियों के उपयोग के लिए आशयित नहीं है, पर हठपूर्वक यात्रा करेगा या अपने शरीर का कोई भाग रेलगाड़ी के बाहर निकालेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा और मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा रेलगाड़ी से हटाया जा सकेगा ।

64. मेट्रो रेल में विधिविरुद्धतया प्रवेश करने या उस पर रहने या मेट्रो रेल लाइन पर चलने के लिए शास्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल में या उस पर किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना प्रवेश करेगा अथवा विधिपूर्ण प्राधिकार से प्रवेश करने के पश्चात् वहां विधिविरुद्धतया रहेगा और किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा उसे छोड़ने के लिए अनुरोध किए जाने पर ऐसा करने से इंकार करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

(2) यदि कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल की लाइन पर किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना चलेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

65. मेट्रो रेल पदधारी द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को संकटापन्न करना-यदि कोई मेट्रो रेल पदधारी ड्यूटी पर होते हुए, किसी यात्री की सुरक्षा को-

(क) उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण कार्य या लोप द्वारा; या

(ख) किसी ऐसे नियम, विनियम या आदेश की, जिसका ऐसा सेवक अपने नियोजन के निबंधनों के अनुसार पालन करने के लिए आबद्ध था और जिसके बारे में उसे जानकारी थी, अवज्ञा द्वारा,

संकटापन्न करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो छह हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

66. बिना प्राधिकार के रेलगाड़ी आदि का परित्याग-यदि किसी मेट्रो रेल पदधारी को, जब वह ड्यूटी पर हो, किसी रेलगाड़ी को चलाने या किसी अन्य चल स्टाक को एक स्टेशन या स्थान से दूसरे स्टेशन या स्थान तक पहुंचाने के संबंध में कोई उत्तरदायित्व सौंपा गया है और वह उस स्टेशन या स्थान पर पहुंचने से पहले बिना प्राधिकार के या ऐसी रेलगाड़ी या चल स्टाक को किस अन्य प्राधिकृत मेट्रो रेल पदधारी को उचित रूप से सौंपे बिना अपनी ड्यूटी का परित्याग कर देगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

67. रेलगाड़ियों आदि के चलने में बाधा डालना-यदि कोई व्यक्ति, किसी मेट्रो रेल की पटरी पर बैठ कर, पिकेटिंग करके या मेट्रो रेल पर बिना प्राधिकार के कोई चल स्टाक रखकर या किसी सिग्नल प्रतिष्ठान से छेड़छाड़ करके या उसके कार्यकरण की यंत्र क्रिया में हस्तक्षेप करके या अन्य प्रकार से मेट्रो रेल पर किसी रेलगाड़ी या अन्य स्टाक को बाधा पहुंचाएगा, पहुंचवाएगा या पहुंचाने का प्रयत्न करेगा तो वह, मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा हटाया जा सकेगा और वह कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा ।

68. मेट्रो रेल पदधारी के कर्तव्यों में बाधा डालना-यदि कोई व्यक्ति, किसी मेट्रो रेल पदधारी के कर्तव्यों के निर्वहन में जानबूझकर बाधा या रुकावट डालेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

69. उचित पास या टिकट के बिना यात्रा या प्राधिकृत दूरी से आगे यात्रा करना-(1) यदि कोई यात्री, –

(क) बिना उचित पास या टिकट के यात्रा करेगा; या

(ख) किसी रेलगाड़ी में होते हुए या उससे उतरने पर अपना पास या टिकट धारा 24 के अधीन उसके लिए कोई मांग की जाने पर परीक्षा या परिदान के लिए तुरंत पेश नहीं करेगा या करने से इंकार करेगा या धारा 25 के उपबंधों के उल्लंघन में रेलगाड़ी से यात्रा करेगा, तो वह, इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा नियुक्त किसी मेट्रो रेल पदधारी द्वारा मांग की जाने पर, उस दूरी के लिए, जिस तक वह यात्रा कर चुका है, एक तरफ के साधारण किराए के, या जहां उस स्टेशन के बारे में जहां से वह चला था कोई संदेह है वह उस स्टेशन से, जहां से रेलगाड़ी आरंभ होकर चली थी, एक तरफ के साधारण किराए के अतिरिक्त उपधारा (3) में वर्णित अधिक प्रभार देने के लिए दायी होगा ।

(2) यदि कोई यात्री, ऐसे सवारी डिब्बे में या पर, या ऐसी रेलगाड़ी द्वारा यात्रा करेगा या यात्रा करने का प्रयत्न करेगा, या किसी सवारी डिब्बे में या पर अपने ऐसे पास या टिकट द्वारा प्राधिकृत स्थान से आगे, यात्रा करेगा, तो वह, इस निमित्त प्राधिकृत किसी मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा मांग की जाने पर, उसके द्वारा दिए गए किराए और उसके द्वारा की गई यात्रा के संबंध में संदेय किराए के बीच के अंतर और उपधारा (3) में निर्दिष्ट अधिक प्रभार के संदाय के लिए दायी होगा ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट ऐसा अधिक प्रभार 50 रुपए होगा ।

(4) यदि उपधारा (1) में वर्णित अधिक प्रभार और किराया, या उपधारा (2) में वर्णित अधिक प्रभार और किराए का कोई अतंर देने के दायित्वाधीन कोई यात्री इन उपधाराओं में से किसी के अधीन उसकी मांग की जाने पर, उसे नहीं देता है या देने से इंकार करता है तो इस निमित्त मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा प्राधिकृत कोई रेल पदधारी ऐसी संदेय राशि की वसूली के लिए, किसी महानगर मजिस्ट्रेट को आवेदन कर सकेगा, मानो वह जुर्माना हो और यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि वह राशि संदेय है तो वह उसे इस प्रकार वसूल किए जाने का आदेश देगा और यह आदेश भी दे सकेगा कि उसके संदाय के लिए दायी व्यक्ति, संदाय न करने पर ऐसा कारावास, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, भोगेगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन वसूल की गई कोई राशि वसूल की जाते ही भारत की संचित निधि को संदत्त की जाएगी ।

70. रेलगाड़ी के संचार साधनों में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करना-यदि कोई यात्री या कोई अन्य व्यक्ति, यात्रियों और रेलगाड़ी के भारसाधक मेट्रो रेल पदधारी के बीच के संचार के लिए मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा रेलगाड़ी में व्यवस्थित किन्हीं साधनों का उपयोग या उनमें हस्तक्षेप, युक्तियुक्त और पर्याप्त कारण के बिना करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

71. पास या टिकट में फेरफार करना या उसे विरूपित करना या उसे कूटकृत करना-यदि कोई व्यक्ति, किसी पास या टिकट में के सुरक्षा कोड को तोड़ेगा या उसे विरूपित करेगा या उसमें फेरफार करेगा या उसे कूटकृत करेगा या उसकी दूसरी प्रति तैयार करेगा या किसी ऐसी रीति से कार्य करेगा जो मेट्रो रेल को राजस्व की हानि कारित करे, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा ।

72. सार्वजनिक सूचनाओं को विरूपित करना-यदि कोई व्यक्ति विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना, –

(क) मेट्रो रेल प्रशासन के आदेश द्वारा मेट्रो रेल या किसी चल स्टाक पर लगाए गए या चिपकाए गए किसी बोर्ड या दस्तावेज को उखाड़ेगा या जानबूझकर नुकसान पहुंचाएगा; या

(ख) किसी ऐसे बोर्ड या दस्तावेज या किसी चल स्टाक पर के किन्हीं अक्षरों या अंकों को मिटाएगा या बदलेगा,

तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

73. मेट्रो रेल पर किन्हीं वस्तुओं का विक्रय-यदि कोई व्यक्ति, मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा ऐसे प्रयोजन के लिए अप्राधिकृत मेट्रो रेल के किसी सवारी डिब्बे में या मेट्रो रेल के किसी भाग पर किसी वस्तु का चाहे वह कोई हो, विक्रय करेगा या उसे विक्रय के लिए प्रदर्शित करेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और जुर्माने के संदाय में चूक होने पर कारावास से, जो, छह मास तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा:

परंतु तत्प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में, जिसका उल्लेख न्यायालय के निर्णय में किया जाएगा, ऐसा जुर्माना एक सौ रुपए से कम का नहीं होगा ।

74. रेलगाड़ी को विद्वेषतः अभिध्वंस करना या ध्वस्त करने का प्रयत्न करना-(1) यदि कोई व्यक्ति, –

(क) किसी मेट्रो रेल से संबंधित किसी रेल या अन्य पदार्थ या चीज को ढीला करेगा या विस्थापित करेगा; या

(ख) किसी मेट्रो रेल के किन्हीं प्वाइंटों या अन्य मशीनरी को घुमाएगा, चलाएगा, खोलेगा या उसका दिशाभंग करेगा; या

(ग) किसी मेट्रो रेल के संबंध में अभिध्वंस या कोई अन्य कार्य करेगा या करवाएगा जिसका उसे यह आशय या जानकारी है कि ऐसे कार्य से मेट्रो रेल पर किसी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए खतरा होने की संभावना है,

तो वह, आजीवन कारावास से या कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा:

परंतु यह कि तत्प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में, जिनका उल्लेख न्यायालय के निर्णय में किया जाएगा, जहां कोई व्यक्ति कठोर कारावास से दंडनीय हो वहां ऐसा कारावास-

(क) प्रथम अपराध के लिए दोषसिद्धि की दशा में, तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, और

(ख) द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए दोषसिद्धि की दशा में, सात वर्ष से कम का नहीं होगा ।

(2) यदि कोई व्यक्ति, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिध्वंस का कोई कार्य या अन्य कार्य विधिविरुद्धतया किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने के आशय से या यह ज्ञान रखते हुए करेगा कि वह कार्य इतना आसन्न रूप से खतरनाक है कि यह पूर्ण रूप से संभाव्य है कि वह कार्य किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित कर दे या किसी व्यक्ति को ऐसी शारीरिक क्षति कर दे जिससे मृत्यु कारित हो जाना संभाव्य हो, वह मृत्यु से या आजीवन कारावास से दंडनीय होगा ।

75. टिकटों के अप्राधिकृत विक्रय के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जो मेट्रो रेल पदधारी या धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन इस निमित्त प्राधिकृत अभिकर्ता नहीं है, किसी टिकट का विक्रय करेगा या विक्रय करने का प्रयत्न करेगा, जिससे कि कोई अन्य व्यक्ति उसे लेकर यात्रा कर सके, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा तथा वह टिकट भी जिसका उसने विक्रय किया हो या जिसके विक्रय करने का प्रयत्न किया हो, समपहृत हो जाएगा ।

76. मेट्रो रेल द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों को विद्वेषतः उपहति पहुंचाना या उपहति पहुंचाने का प्रयत्न करना-यदि कोई व्यक्ति, रेलगाड़ी के भागस्वरूप किसी चल स्टाक पर, उसके सामने, उसमें या उसके ऊपर कोई काष्ठ, पत्थर या अन्य पदार्थ या चीज इस आशय से या यह ज्ञान रखते हुए कि यह संभाव्य है कि उससे ऐसे चल स्टाक में या उस पर या उसी रेलगाड़ी के भागस्वरूप किसी अन्य चल स्टाक में या उस पर विद्यमान किसी व्यक्ति की सुरक्षा संकटापन्न हो जाए, विधिविरुद्धतया फेंकेगा या गिराएगा या मारेगा तो वह आजीवन कारावास से, या कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा ।

77. मेट्रो रेल द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा को उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण कार्य या लोप से संकटापन्न करना-यदि कोई व्यक्ति, उतावलेपन से और उपेक्षापूर्ण रीति से कोई कार्य करेगा, या ऐसा कार्य करने का लोप करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध है, और उस कार्य या लोप से मेट्रो रेल पर यात्रा करने वाले या विद्यमान किसी व्यक्ति की सुरक्षा संकटापन्न होनी संभाव्य है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

78. कतिपय मेट्रो रेल संपत्तियों का नुकसान या विनाश-(1) जो कोई व्यक्ति, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मेट्रो रेल संपत्तियों में से किसी का नुकसान या नाश कारित करने के आशय से या यह ज्ञान रखते हुए कि उससे कारित होना संभाव्य है, ऐसी संपत्ति को नुकसान अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कारित करेगा या अन्यथा कारित करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मेट्रो रेल संपत्तियां, मेट्रो रेल की पटरी, सुरंग, उपपथ, बाक्स संरचना, स्टेशनों के भवन और संस्थापन, सवारी डिब्बे और वैगन, चल स्टाक, सिगनल, दूर संचार, वातानुकूलन और वातायन उपकरण, विद्युत उप स्टेशन, जल निकास पम्प, स्वचालित सीढ़ियां, लिफ्ट, प्रकाश संस्थापन, टिकट बेचने वाली मशीन, टिकट बैरियर, विद्युत कर्षण और ब्लाग उपस्कर और ऐसी अन्य संपत्तियां हैं, जिन्हें केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।

79. मेट्रो रेल द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा को जानबूझकर किए गए कार्य या लोप द्वारा संकटापन्न करना-यदि कोई व्यक्ति, किसी मेट्रो रेल पर यात्रा करने वाले या विद्यमान किसी व्यक्ति की सुरक्षा को किसी विधिविरुद्ध कार्य या जानबूझकर किए गए किसी लोप या उपेक्षा से या सुरक्षा युक्तियों को छोड़कर संकटापन्न करेगा या कारित करेगा या किसी मेट्रो रेल पर किसी चल स्टाक में बाधा डालेगा या डलवाएगा या बाधा डालने का प्रयत्न करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा :

परंतु न्यायालय के निर्णय में उल्लिखित प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में ऐसा कारावास, –

(i) प्रथम दोषसिद्धि की दशा में, छह मास से कम नहीं होगा; और

(ii) द्वितीय और पश्चात्वर्ती अपराध के लिए दोषसिद्धि की दशा में दो वर्ष से कम नहीं होगा ।

80. प्रतिकर के लिए मिथ्या दावा करने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, अध्याय 10 के अधीन किसी मेट्रो रेल प्रशासन से किसी प्रतिफल की अपेक्षा करने वाला ऐसा दावा करेगा जो मिथ्या है या जिसके मिथ्या होने का उसे या तो ज्ञान या विश्वास है या जिसके सही होने का उसे विश्वास नहीं है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

81. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया हो वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए, उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार, अपने विरुद्ध कार्रवाई किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार, अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए-

(क) कंपनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम भी है; और

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

82. बिना वारंट के गिरफ्तार करने की शक्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति, धारा 59, धारा 61, धारा 65 से धारा 79 तक में वर्णित कोई अपराध करेगा, तो वह किसी मेट्रो रेल पदधारी या पुलिस अधिकारी द्वारा, जो हैड कांस्टेबल की पंक्ति से नीचे का न हो, या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, जिसे ऐसा मेट्रो रेल पदधारी या पुलिस अधिकारी अपनी सहायता के लिए बुला सकेगा, वारंट या अन्य लिखित प्राधिकार के बिना गिरफ्तार किया जा सकेगा:

परंतु जहां कोई व्यक्ति, पुलिस अधिकारी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किया गया है वहां वह उसे पुलिस अधिकारी के हवाले कर देगा या पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में ऐसे व्यक्ति को अभिरक्षा में निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या भिजवाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन इस प्रकार गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर, ऐसी गिरफ्तारी के पश्चात् यथासंभव शीघ्र किंतु चौबीस घंटे की कालावधि के भीतर उस निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा जिसे उसका विचारण करने का या विचारण के लिए सुपुर्द करने का प्राधिकार है ।

83. ऐसे व्यक्तियों की गिरफ्तारी जिनका फरार आदि होना संभाव्य है-(1) यदि कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन धारा 82 में वर्णित अपराध से भिन्न कोई अपराध करता है या धारा 69 के अधीन मांगे गए अधिक प्रभार या अन्य राशि का संदाय करने में असफल रहता है या इन्कार करता है और विश्वास करने के लिए कारण है कि वह फरार हो सकेगा, या उसका नाम और पता अज्ञात है और वह मांगे जाने पर अपना नाम और पता देने से इन्कार करेगा या जहां यह विश्वास करने का कारण है कि उसके द्वारा दिया गया नाम और पता सही नहीं है तो कोई मेट्रो रेल पदधारी या कोई पुलिस अधिकारी, जो हैड कांस्टेबल की पंक्ति से नीचे का न हो, या कोई व्यक्ति, जिसे ऐसा मेट्रो रेल पदधारी अपनी सहायता के लिए बुला सकेगा, वारंट या लिखित प्राधिकार के बिना उसे गिरफ्तार कर सकेगा ।

(2) इस प्रकार गिरफ्तार कोई व्यक्ति, उस अपराध के लिए उसका विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर, ऐसी गिरफ्तारी के पश्चात् यथासंभव शीघ्र किंतु चौबीस घंटे की कालावधि के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा ।

84. अधिनियम के अधीन अधिकारिता रखने वाला मजिस्ट्रेट-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

85. विचारण का स्थान-(1) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन अपराध करने वाले किसी व्यक्ति का ऐसे अपराध के लिए विचारण ऐसे किसी स्थान पर, जहां वह हो या जिसे [राज्य सरकार] इस निमित्त अधिसूचित करे, और किसी अन्य स्थान पर भी जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसका विचारण किया जा सकता हो, किया जा सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अधिसूचना [राज्य सरकार द्वारा] प्रकाशित की जाएगी और उसकी एक प्रति ऐसे मेट्रो रेल स्टेशनों के, जिन्हें सरकार निर्दिष्ट करे, किसी सहजदृश्य स्थान में सार्वजनिक जानकारी के लिए प्रदर्शित की जाएगी ।

अध्याय 12

प्रकीर्ण

86. केंद्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, मेट्रो रेल प्रशासन, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों और कृत्यों के निर्वहन में नीति के प्रश्न संबंधी ऐसे निदेशों द्वारा आबद्ध होगा, जो केंद्रीय सरकार द्वारा लिखित में समय-समय पर दिए जाएं:

परंतु यह कि मेट्रो रेल प्रशासन को यथाशाध्य शीघ्र इस धारा के अधीन कोई निदेश जो इस धारा के अधीन दिया गया है, देने से पूर्व अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।

87. गैर-सरकारी मेट्रो रेल के रूप में कार्य का प्रतिषेध-कोई भी गैर-सरकारी मेट्रो रेल, केंद्रीय सरकार से अनुमति अभिप्राप्त किए बिना कार्य नहीं करेगी ।

88. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों या किए गए किन्हीं आदेशों के अनुसरण में, सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार, किसी मेट्रो रेल प्रशासन, मेट्रो रेल पदधारी या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।

89. मेट्रो रेल संपत्ति के विरुद्ध निष्पादन पर निर्बन्धन-(1) कोई चल स्टाक, मेट्रो रेल पथ, मशीनरी, संयंत्र, औजार, फिटिंग, सामग्री या चीजबस्त, जो मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा अपनी रेल पर यातायात के, या अपने स्टेशन या कर्मशाला या कार्यालय के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाई जाती है या उपलब्ध कराई जाती है, किसी न्यायालय की या स्थानीय प्राधिकारी या ऐसे किसी व्यक्ति की, जिसे विधि द्वारा संपत्ति को कुर्क या करस्थम् करने या संपत्ति को निष्पादन में अन्यथा लेने की शक्ति प्राप्त है, किसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं ली जाएगी ।

(2) उपधारा (1) की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह मेट्रो रेल के उपार्जनों को किसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में कुर्क कर लेने के किसी न्यायालय के प्राधिकार पर प्रभाव डालती है ।

90. मेट्रो रेल प्रशासन के पदधारियों का लोक सेवक होना-मेट्रो रेल प्रशासन के नियोजन में सभी व्यक्ति, जो इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्य करते हैं, या तात्पर्यित हैं, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।

91. मेट्रो रेल पदधारी द्वारा निरुद्ध संपत्ति के मेट्रो रेल प्रशासन को परिदान के लिए प्रक्रिया-यदि कोई मेट्रो रेल पदधारी सेवोन्मोचित या निलंबित कर दिया जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है या फरार हो जाता है या स्वयं अनुपस्थित रहता है और वह या उसकी पत्नी या विधवा या उसके कुटुंब का कोई सदस्य या उसका प्रतिनिधि, मेट्रो रेल प्रशासन को यथापूर्वोक्त किसी ऐसी घटना के घटने पर ऐसे रेल पदधारी के कब्जे या अभिरक्षा में मेट्रो रेल प्रशासन का कोई स्टेशन, निवास गृह, कार्यालय या अन्य भवन उसके अनुलग्नकों सहित या कोई पुस्तकें, कागजपत्र, चाबियां, उपस्कर या अन्य वस्तुएं और जो यथापूर्वोक्त ऐसी किसी घटना के होने पर मेट्रो रेल पदधारी के कब्जे या अभिरक्षा में है, उस प्रयोजन के लिए लिखित सूचना के पश्चात्, मेट्रो रेल प्रशासन को या मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति को देने से इन्कार करता है या देने में उपेक्षा करता है तो कोई महानगर मजिस्ट्रेट मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा या उसकी ओर से किए गए आवेदन पर किसी पुलिस अधिकारी को आदेश दे सकेगा कि वह उचित सहायता सहित उस स्टेशन, कार्यालय या अन्य भवन में प्रवेश करे और वहां पाए जाने वाले किसी व्यक्ति को हटा दे और उसका कब्जा ले ले या पुस्तकों, कागजपत्रों या अन्य वस्तुओं को कब्जे में ले ले और उन्हें मेट्रो रेल प्रशासन को या मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा उस निमित्त नियुक्त व्यक्ति को परिदत्त कर दे ।

92. अभिलेखों और दस्तावेजों में प्रविष्टियों का सबूत-(1) मेट्रो रेल प्रशासन के अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों में की गई प्रविष्टियों को मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा या उसके विरुद्ध सब कार्यवाहियों में साक्ष्य में ग्रहण किया जाएगा और ऐसी सब प्रविष्टियां, या तो ऐसी प्रविष्टियां अंतर्विष्ट करने वाले मेट्रो रेल प्रशासन के अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों के पेश किए जाने पर या उन प्रविष्टियों की ऐसी प्रतिलिपि पेश किए जाने पर जो उन अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों की अभिरक्षा रखने वाले अधिकारी द्वारा उसके हस्ताक्षरों के अधीन इस कथन के साथ प्रमाणित हो कि वह मूल प्रविष्टियों की सत्य प्रतिलिपि है और ऐसी मूल प्रविष्टियां उसके कब्ज़े में रेल प्रशासन के अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों में अंतर्विष्ट हैं, साबित की जा सकेंगी ।

(2) किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, न्यायालय यह अवधारण करेगा कि उपधारा (1) के अधीन साक्ष्य में स्वीकार किए गए मेट्रो रेल प्रशासन के अभिलेखों की प्रविष्टियां तब तक सही हैं जब तक साक्ष्य इसके प्रतिकूल न हो ।

93. मेट्रो रेल प्रशासन पर सूचना, आदि की तामील-इस अधिनियम द्वारा मेट्रो रेल प्रशासन पर तामील की जाने वाली अपेक्षित या प्राधिकृत कोई सूचना या अन्य दस्तावेज, –

(क) मेट्रो रेल प्रशासन के कार्यालय में उसे छोड़कर; या

(ख) मेट्रो रेल प्रशासन कार्यालय के पते पर रजिस्ट्रीकृत डाक से भेज कर, तामील किया जा सकेगा ।

94. मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा सूचना, आदि की तामील-किसी ऐसी सूचना या अन्य दस्तावेजों की, जिसकी मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा किसी व्यक्ति पर तामील करना इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित या प्राधिकृत है, –

(क) ऐसे व्यक्ति को परिदत्त करके; या

(ख) उस व्यक्ति के प्रायिक या अंतिम ज्ञात निवास-स्थान पर उसे छोड़कर; या

(ग) उस व्यक्ति को उसके प्रायिक या अंतिम ज्ञात निवास-स्थान के पते पर रजिस्ट्रीकृत डाक से भेजकर, तामील की जा सकेगी ।

95. जहां सूचना की तामील रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा की गई है वहां उपधारणा-जहां सूचना या अन्य दस्तावेज की तामील डाक द्वारा की जाती है वहां यह समझा जाएगा कि उसकी तामील उस समय हो गई जब उसे अंतर्विष्ट रखने वाला पत्र डाक के सामान्य अनुक्रम में परिदत्त हो जाता और ऐसी तामील को साबित करने में यह साबित करना पर्याप्त होगा कि सूचना या अन्य दस्तावेज अंतर्विष्ट रखने वाले पत्र पर ठीक पता लिखा गया था और वह रजिस्ट्रीकृत था ।

96. मेट्रो रेल प्रशासन का प्रतिनिधित्व-(1) मेट्रो रेल प्रशासन, लिखित आदेश द्वारा, किसी सिविल, दांडिक या अन्य न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही में, यथास्थिति, उसकी ओर से कार्य करने के लिए या उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी मेट्रो रेल पदधारी या अन्य किसी व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगा ।

(2) मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा उसकी ओर से अभियोजन संचालित करने के लिए उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत कोई व्यक्ति, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 302 में किसी बात के होते हुए भी, मजिस्ट्रेट की अनुज्ञा के बिना ऐसे अभियोजनों को संचालित करने के लिए हकदार होगा ।

97. सुरक्षा कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति-मेट्रो रेल प्रशासन, अपनी रेल के लिए सुरक्षा कर्मचारिवृन्द का गठन और अनुरक्षण कर सकेगा तथा ऐसे कर्मचारिवृन्द की शक्तियां, कर्तव्य और कृत्य ऐसे होंगे, जो विहित किए जाएं ।

98. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियां, धारा 22, धारा 32, धारा 47, धारा 56, धारा 99, धारा 100 को छोड़कर, में से किसी का प्रयोग ऐसे विषयों के संबंध में और ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी या केंद्रीय सरकार के अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा या मेट्रो रेल प्रशासन के ऐसे अधिकारी द्वारा भी प्रयोक्तव्य होंगी ।

(2) मेट्रो रेल प्रशासन लिखित में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, अपने किसी सेवक को ऐसी शर्तों और सीमाओं, यदि कोई हों, के अध्यधीन, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, धारा 101 के अधीन अपनी शक्तियों के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

99. कठिनाइयोंकोदूरकरनेकीशक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगीः

परंतु ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

100. केंद्रीयसरकारकीनियमबनानेकीशक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, इस उपधारा के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: –

(क) धारा 12 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने का प्ररूप और भेजने का समय;

(ख) धारा 35 के अधीन किराया नियतन समिति के निबंधन और शर्तें;

(ग) धारा 35 के अधीन किराया नियतन समिति द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;

(घ) धारा 57 के अधीन संदेय प्रतिकर की सीमा;

(ङ) धारा 97 के अधीन मेट्रो रेल के सुरक्षा कर्मचारिवृन्द की शक्तियां, कर्तव्य और कृत्य; और

(च) इस अधिनियम के अन्यत्र अंतर्विष्ट नियम बनाने की किसी शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, साधारणतः इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए ।

101. मेट्रोरेलप्रशासनकीविनियमबनानेकीशक्तिमेट्रो रेल प्रशासन, ऐसे सभी मामलों, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए उपबंध आवश्यक या समीचीन हैं, का उपबंध करने के लिए केंद्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ऐसे विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

102. संसद्केसमक्षनियमोंऔरविनियमोंकारखाजाना-इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और मेट्रो रेल प्रशासन द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम, उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, यथास्थिति, तत्पश्चात् वह नियम या विनियम ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा; तथापि नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

103. अन्यअधिनियमितियोंसेअसंगतअधिनियमकाप्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में या किसी अन्य लिखत में, जिनका प्रभाव इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर है, अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

104. अन्यअधिनियमोंकालागूहोना-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के उपबंध भूमिगत रेल (संकर्म सन्निर्माण) अधिनियम, 1978 (1978 का 33) के अतिरिक्त होंगे न कि उनके अल्पीकरण में ।

105. निरसनऔरव्यावृत्ति-(1) दिल्ली मेट्रो रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अध्यादेश, 2002 (2002 का अध्यादेश सं० 7) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

Note : सभी तरह के एक्ट देखने और समझकर सरल माध्यम से समझाने लिए IPC का सहारा लिया गया है और आप भी भारतीय न्याय व्यवस्था में अपना भरोसा बनाकर इन्हें पढ़े और ज्यादा बेहतर समझ के लिए किसी अच्छे वकील से संपर्क करें. यदि आपको कोई त्रुटी मिले तो comment करके हमें बताये हम जुरूर सुधारने का प्रयास करेंगे. आर्टिकल या पोस्ट में लिखी किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे.

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