राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान अधिनियम 2007

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान अधिनियम 2007

[राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान] अधिनियम, 2007 (2007 का अधिनियम संख्यांक 29) [5 जून, 2007] 1[कुछ प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों] को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करने और इंजीनियरी, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, शिक्षा, विज्ञान और कला की शाखाओं में शिक्षण और अनुसंधान करने तथा ऐसी शाखाओं में विद्या की अभिवृद्धि और ज्ञान का प्रसार करने और ऐसे संस्थानों से संबंधित कुछ विषयों का उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के अठावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो, –

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम [राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान] अधिनियम, 2007 है ।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

2. कतिपय संस्थाओं की राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के रूप में घोषणा– [ [पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची] और तीसरी अनुसूची] में वर्णित संस्थाओं के उद्देश्य ऐसे हैं, जो उन्हें राष्ट्रीय महत्व की संस्थाएं बनाते हैं, अतः यह घोषित किया जाता है कि प्रत्येक ऐसी संस्था, राष्ट्रीय महत्व की संस्था है ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, –

(क) बोर्ड से”, किसी संस्थान के संबंध में, उसका शासक बोर्ड अभिप्रेत है;

(ख) अध्यक्ष से”, बोर्ड का अध्यक्ष, अभिप्रेत है;

(ग) तत्समान संस्थान” से, [ [पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची] और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (2) में वर्णित किसी सोसाइटी के संबंध में, 5[6पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (3) में यथा विनिर्दिष्ट कोई संस्थान अभिप्रेत है;

(घ) परिषद्” से, 5[यथस्थिति, धारा 30 की उपधारा (1) ॥।] के अधीन स्थापित परिषद् अभिप्रेत है;

(ङ) उपनिदेशक” से, किसी संस्थान के संबंध में, उसका उपनिदेशक अभिप्रेत है;

(च) निदेशक” से, किसी संस्थान के संबंध में, उसका निदेशक अभिप्रेत है;

(छ) संस्थान” से, 5[6पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (3) में वर्णित संस्थाओं में से कोई अभिप्रेत है;

(ज) अधिसूचना” से, राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है;

(झ) विहित” से, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ञ) कुलसचिव” से, किसी संस्थान के संबंध में, उसका कुलसचिव अभिप्रेत है;

(ट) अनुसूची” से, इस अधिनियम से उपाबद्ध [ पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची] और तीसरी अनुसूची] अभिप्रेत है;

(ठ) सिनेट” से, किसी संस्थान के संबंध में उसकी सिनेट अभिप्रेत है;

(ड) सोसाइटी” से, सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत और 1[2पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (2) में वर्णित सोसाइटियों में से कोई अभिप्रेत है;

(ढ) किसी संस्थान के संबंध में परिनियम” और अध्यादेश” से, उस संस्थान के इस अधिनियम के अधीन बनाए गए परिनियम और अध्यादेश अभिप्रेत हैं ।

अध्याय 2

संस्थान

4. संस्थानों का निगमन-(1) [ पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची] और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (3) में वर्णित संस्थानों में से प्रत्येक शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय होगा और वह उक्त नाम से वाद जाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

  [(1क) बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर को इस अधिनियम के अधीन निगमित हुआ समझा जाएगा और ऐसे निगमन पर इसे भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर कहा जाएगा ।]

(2) उक्त संस्थानों में से प्रत्येक को गठित करने वाले निगमित निकाय में एक अध्यक्ष, एक निदेशक और संस्थान के उस समय के बोर्ड के अन्य सदस्य होंगे ।

5. संस्थानों के निगमन का प्रभाव-इस अधिनियम के प्रारंभ से ही,-

(क) इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि में या किसी संविदा या किसी अन्य लिखत में किसी सोसाइटी के प्रति निर्देश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह तत्समान संस्थान के प्रति निर्देश है; 

(ख) सोसाइटी की या उसके स्वामित्व में की सभी संपत्ति, चाहे स्थावर हो या जंगम, तत्समान संस्थान में निहित होगी;

(ग) सोसाइटी के सभी अधिकार और दायित्व तत्समान संस्थान को अंतरित हो जाएंगे और वे उसके अधिकार और दायित्व होंगे;

(घ) ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले सोसाइटी द्वारा नियोजित प्रत्येक व्यक्ति अपना पद या सेवा तत्समान संस्थान में उसी सेवा निवृत्ति के अनुसार, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं शर्तों और निबंधनों पर और पेंशन, अवकाश, उपदान, भविष्य निधि और अन्य मामलों के बारे में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों पर धारण करेगा जैसा कि वह उस दशा में धारण करता जिसमें यह अधिनियम पारित नहीं किया जाता और तब तक इसी प्रकार धारण करता रहेगा जब तक उसका नियोजन समाप्त नहीं कर दिया जाता है या जब तक उसकी सेवा की अवधि, पारिश्रमिक और निबंधन और शर्तें परिनियमों द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती हैंः

परंतु यदि इस प्रकार किया गया परिवर्तन ऐसे कर्मचारी को स्वीकार्य नहीं है तो उसका नियोजन संस्थान द्वारा कर्मचारी के साथ की गई संविदा के निबंधनों के अनुसार समाप्त किया जा सकेगा या, यदि उसमें इस निमित्त कोई उपबंध नहीं किया गया है तो, स्थायी कर्मचारियों के संबंध में तीन मास के पारिश्रमिक के बराबर और अन्य कर्मचारियों के संबंध में एक मास के पारिश्रमिक के बराबर प्रतिकर का उसको संदाय करके संस्थान द्वारा समाप्त किया जा सकेगा ।

 [5क. बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के निगमन का प्रभाव-राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से ही-

(क) बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के प्रति किसी विधि, संविदा या अन्य लिखत में निर्देश को भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर के प्रति निर्देश समझा जाएगा;

(ख) बंगाल इजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर की सभी जंगम और स्थावर संपत्ति भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर में निहित हो जाएगी;

(ग) बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के सभी अधिकार और दायित्व भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर के अधिकार और दायित्व होंगे;

(घ) प्रत्येक व्यक्ति (जिसके अंतर्गत निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी हैं) जो, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 प्रारंभ की तारीख से तुरंत पूर्व बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर में नियोजित है ऐसे प्रारंभ को और उसके पश्चात् भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर का कर्मचारी हो जाएगा और अपना पद या सेवा उसी अवधि के लिए और उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर तथा पेंशन, अवकाश, उपदान, भविष्य निधि और अन्य विषयों के संबंध में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों पर धारण करेगा जैसे कि वह राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ को ऐसे धारण करता जैसे कि उक्त अधिनियम प्रवर्तन में नहीं लाया गया था और वह तब तक ऐसा करना जारी रखेगा जब तक उनके नियोजन को समाप्त नहीं कर दिया जाता है या जब तक ऐसी पदावधि, पारिश्रमिक, निबंधनों और शर्तों में परिनियमों या अध्यादेशों द्वारा परिवर्तन नहीं कर दिया जाता है :

परंतु ऐसे व्यक्ति की पदावधि, पारिश्रमिक, सेवा के निबंधनों और शर्तों में उसके हित के प्रतिकूल, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना परिवर्तन नहीं किया जाएगा:

परंतु यह और कि बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के कुलपति और उपकुलपति के प्रति किसी विधि, लिखत या अन्य दस्तावेज में उक्त अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व किए गए किसी निर्देश का अर्थ क्रमशः भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर के कुलाध्यक्ष और निदेशक के प्रति निर्देश के रूप में लगाया जाएगा;

(ङ) बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर का उपकुलपति भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर का उस तारीख तक, जब तक केन्द्रीय सरकार भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर के नए निदेशक की नियुक्ति नहीं कर देती है, का निदेशक होगा;

(च) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से तुरन्त पूर्व बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर द्वारा प्रवेश या डिग्रियां प्रदान करने के लिए संचालित की गई परीक्षा वैध परीक्षा होगी और इसे भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर द्वारा संचालित किया गया समझा जाएगा ।]

6. संस्थानों की शक्तियां-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग और निम्नलिखित कर्तव्यों का पालन करेगा, अर्थात्ः-

(क) इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी, प्रबंध, शिक्षा, विज्ञान और कला की ऐसी शाखाओं में, जो संस्थान ठीक समझे, शिक्षण और अनुसंधान की और ऐसी शाखाओं में विद्या की अभिवृद्धि और ज्ञान के प्रसार की व्यवस्था करना;

(ख) परीक्षाएं लेना और उपाधियां, डिप्लोमा और अन्य विद्या संबंधी विशिष्ट उपाधियां या पदवियां प्रदान करना;

(ग) सम्मानिक उपाधियां या अन्य विशिष्ट उपाधियां प्रदान करना;

(घ) फीस और अन्य प्रभार नियत करना, उनकी मांग करना और प्राप्त करना;

(ङ) छात्रों के आवास के लिए छात्र निवास और छात्रावासों की स्थापना करना, उनका अनुरक्षण और प्रबंध करना;

(च) संस्थान के छात्रों के आवास का पर्यवेक्षण और नियंत्रण और उनके अनुशासन का विनियमन और उनके स्वास्थ्य, सामान्य कल्याण और सांस्कृतिक तथा सामूहिक जीवन के विकास की व्यवस्था करना;

(छ) संस्थान के छात्रों के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर की यूनिटों के अनुरक्षण के लिए व्यवस्था करना;

(ज) अध्यापन और अन्य पदों की, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, स्थापना करना और निदेशक ॥। के पद को छोड़कर उन पदों पर नियुक्तियां करना;

(झ) परिनियम और अध्यादेश बनाना और उनका परिवर्तन, उपांतरण और विखंडन करना;

(ञ) संस्थान की या उसमें निहित किसी संपत्ति का, ऐसी रीति से व्यवहार करना, जो संस्थान अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए ठीक समझे;

(ट) सरकार से दान, अनुदान, संदान या उपकृति प्राप्त करना और, यथास्थिति, वसीयतकर्ताओं, संदानकर्ताओं या अंतरकों से स्थावर जा जंगम संपत्ति की वसीयत, संदान और अंतरण प्राप्त करना;

(ठ) विश्व के किसी भी भाग के ऐसे शैक्षणिक या अन्य संस्थाओं से, जिनके उद्देश्य संस्थानों के उद्देश्यों से पूर्णतः या भागतः समान हैं, शिक्षकों और विद्वानों के आदान-प्रदान द्वारा और साधारणतः ऐसी रीति से सहयोग करना, जो उनके समान उद्देश्यों के लिए सहायक हों;

(ड) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, छात्र-सहायता वृत्तियां, पुरस्कार और मैडल संस्थित करना और प्रदान करना;

(ढ) संस्थान से संबंधित क्षेत्रों या विद्या शाखाओं में परामर्श देना; और

(ण) ऐसी अन्य सभी बातें करना, जो संस्थान के सभी या किन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक, आनुषंगिक या सहायक हों ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई संस्थान केंद्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना किसी स्थावर संपत्ति का, किसी रीति से, व्ययन नहीं करेगा ।

7. संस्थानों का सभी मूलवंश, पंथ और वर्गों के लिए खुला होना-(1) प्रत्येक संस्थान स्त्रियों और पुरुषों के लिए खुला होगा, चाहे वे किसी भी मूलवंश, पंथ, जाति या वर्ग के हों और सदस्यों, छात्रों, शिक्षकों या कर्मकारों को प्रवेश या उनकी नियुक्ति करने में या किसी भी अन्य बात के संबंध में धार्मिक विश्वास या मान्यता का कोई मानदंड या शर्त अधिरोपित नहीं की जाएगी ।

(2) कोई संस्थान किसी संपत्ति की ऐसी वसीयत, संदान या अंतरण स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें परिषद् की राय में इस धारा के भाव और उद्देश्य के विरुद्ध शर्तें या बाध्यताएं अंतर्ग्रस्त हैं ।

8. संस्थान में शिक्षा-प्रत्येक संस्थान में सभी शिक्षण-कार्य, संस्थान द्वारा या उसके नाम से इस निमित्त बनाए गए परिनियमों और अध्यादेशों के अनुसार किया जाएगा ।

9. कुलाध्यक्ष-(1) भारत का राष्ट्रति, प्रत्येक संस्थान का कुलाध्यक्ष होगा ।

(2) कुलाध्यक्ष, किसी संस्थान के कार्य और प्रगति का पुनर्विलोकन करने के लिए और उसके कार्यकलापों की जांच करने के लिए और उन पर रिपोर्ट ऐसी रीति से देने के लिए, जैसा कुलाध्यक्ष निदेश दे, एक या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगा ।

(3) ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, कुलाध्यक्ष ऐसी कार्यवाही कर सकेगा और ऐसे निदेश जारी कर सकेगा, जो वह रिपोर्ट में चर्चित किन्हीं विषयों के संबंध में आवश्यक समझे और संस्थान युक्तियुक्त समय के भीतर उन निदेशों का अनुपालन करने के लिए बाध्य होगा ।

10. संस्थानों के प्राधिकारी-संस्थान के निम्नलिखित प्राधिकारी होंगे, अर्थात्ः-

(क) शासक बोर्ड;

(ख) सिनेट; और 

(ग) ऐसे अन्य प्राधिकारी, जो परिनियमों द्वारा संस्थान के प्राधिकारी घोषित किए जाएं ।

11. शासक बोर्ड– [पहली अनुसूची में वर्णित प्रत्येक संस्थान] के बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-

(क) अध्यक्ष, जो कुलाध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(ख) निदेशक, पदेन;

(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा उन व्यक्तियों में से, जो तकनीकी शिक्षा और वित्त से संबंधित हैं, दो व्यक्ति, जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों, नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

(घ) उस राज्य की सरकार द्वारा, जिसमें 1[पहली अनुसूची में वर्णित वह संस्थान] स्थित है, उन व्यक्तियों में से, जो उस सरकार की राय में ख्यातिप्राप्त प्रौद्यागिकीविद्, या उद्योगपति हैं, दो व्यक्ति, नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

(ङ) शिक्षा, इंजीनियरी या विज्ञान का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले दो व्यक्ति, जिनमें से कम से कम एक महिला होगी, परिषद् द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे; ॥।

(च) 1[पहली अनुसूची में वर्णित संस्थान] का एक आचार्य और एक सहायक आचार्य या एक प्राध्यापक सिनेट द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ।

 [(छ) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का ऐसा निदेशक, जिसके जोन में संस्थान अवस्थित है या उसका नामनिर्देशिती, जो आचार्य की पंक्ति से नीचे का न हो ।]

 [11क.  [दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] के संस्थानों के बोर्ड-2[दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] में वर्णित प्रत्येक संस्थान का बोर्ड, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्: –

(क) अध्यक्ष, जो कुलाध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(ख) सचिव, उच्चतर शिक्षा विभाग, भारत सरकार या उसका नामनिर्देशिती, जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, पदेन;

(ग) संस्थान का निदेशक, पदेन;

(घ) निदेशक, भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर, पदेन;

(ङ) किसी एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का निदेशक, जो केंद्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(च) भारत सरकार के दो सचिव, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा अपने वैज्ञानिक या औद्योगिक मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(छ) उस राज्य का मुख्य सचिव, जिसमें संस्थान अवस्थित है या उसका नामनिर्देशिती जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, पदेन;

(ज) संस्थान के दो आचार्य, जिन्हें सिनेट द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(झ) शिक्षा, इंजीनियरी या विज्ञान के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले दो प्रख्यात वैज्ञानिक जिनमें से एक महिला होगी जिन्हें परिषद् द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा; और

(ञ) वित्त सलाहकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पदेन ।]

12. बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, रिक्तियां और उन्हें संदेय भत्ते-इस धारा में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, –

(क) बोर्ड के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की पदावधि, उनके नामनिर्देशन की तारीख से तीन वर्ष होगी;

(ख) पदेन सदस्य की पदावधि तब तक होगी जब तक वह उस पद को धारण किए रहता है, जिसके आधार पर वह सदस्य है;

(ग) धारा 11 के खंड (च) [और धारा 11क के खंड (ज)] के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि उसके नामांकन की तारीख से दो वर्ष होगी;

(घ) किसी आकस्मिक रिक्ति को [यथास्थिति, धारा 11 या धारा 11 क] के उपबंधों के अनुसार भरा जाएगा;

(ङ) किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि, उस सदस्य की पदावधि के शेष भाग तक होगी, जिसके स्थान पर उसे नामनिर्दिष्ट किया गया है;

(च) बोर्ड के सदस्य, संस्थान से ऐसे भत्ते लेने के, यदि कोई हों, हकदार होंगे जो परिनियमों में उपबंधित किए जाएं, किंतु धारा 11 के खंड (ख) और (च) 3[और धारा 11क के खंड (ग) और खंड (ज)] में निर्दिष्ट सदस्यों से भिन्न कोई सदस्य इस खंड के कारण किसी वेतन का हकदार नहीं होगा ।

13. बोर्ड की शक्तियां और कृत्य-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान का बोर्ड संस्थान के कार्यकलापों के साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होगा और संस्थान की उन सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जिनका इस अधिनियम, परिनियमों और अध्यादेशों द्वारा अन्यथा उपबंध नहीं किया गया है और उसको सिनेट के कार्यों का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक संस्थान का बोर्ड, –

(क) संस्थान के प्रशासन और कार्यकरण से संबंधित नीति के प्रश्नों का विनिश्चय करेगा;

(ख) संस्थान में पाठ्यक्रम संस्थित करेगा;

(ग) परिनियम बनाएगा;

(घ) संस्थान में शैक्षणिक और अन्य पद संस्थित करेगा और उन पर व्यक्तियों की नियुक्ति करेगा;

(ङ) अध्यादेशों पर विचार करेगा और उपांतरण करेगा या उन्हें रद्द करेगा;

(च) संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखाओं और आगामी वित्तीय वर्ष के बजट प्राक्कलनों पर विचार करेगा और ऐसे संकल्प पारित करेगा, जो वह ठीक समझे, और उन्हें अपनी विकास योजनाओं के विवरण सहित, परिषद् को प्रस्तुत करेगा;

(छ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा उसको प्रदत्त किए जाएं या उस पर अधिरोपित किए जाएं ।

(3) बोर्ड को ऐसी समितियां नियुक्त करने की शक्ति होगी, जो वह इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक समझे ।

14. सिनेट-प्रत्येक संस्थान की सिनेट में निम्नलिखित व्यक्ति होंगे, अर्थात्ः-

(क) निदेशक, पदेन, जो सिनेट का अध्यक्ष होगा;

(ख) उपनिदेशक, पदेन;

(ग) संस्थान में शिक्षा देने के प्रयोजन के लिए संस्थान द्वारा नियुक्त या उस रूप में मान्यताप्राप्त आचार्य;

(घ) ऐसे तीन व्यक्ति, जिनमें से एक स्त्री होगी, जो संस्थान के कर्मचारी न हों, और जिन्हें निदेशक के परामर्श से अध्यक्ष द्वारा, विज्ञान, इंजीनियरी और मानविकी के क्षेत्रों में से प्रत्येक क्षेत्र के लिए ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों में से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा; और

(ङ) कर्मचारिवृंद में से अन्य ऐसे सदस्य, जिन्हें परिनियमों में अधिकथित किया जाए ।

15. सिनेट के कृत्य-इस अधिनियम, परिनियमों और अध्यादेशों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी संस्थान की सिनेट, संस्थान में शिक्षण, शिक्षा और परीक्षा के स्तरों का नियंत्रण और साधारण विनियमन करेगी और उनको बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होगी और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगी, जो परिनियमों द्वारा उसे प्रदत्त या अधिरोपित किए जाएं ।

16. बोर्ड का अध्यक्ष-(1) अध्यक्ष सामान्यतया बोर्ड के अधिवेशनों की और संस्थान के दीक्षांत समारोहों की अध्यक्षता करेगा ।

(2) अध्यक्ष का यह कर्तव्य होगा कि वह यह सुनिश्चित करे कि बोर्ड द्वारा किए गए विनिश्चयों का क्रियान्वयन हो रहा है ।

(3) अध्यक्ष ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा, जो इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा उसे सौंपे जाएं ।

17. निदेशक और उपनिदेशक-(1) कुलाध्यक्ष द्वारा, किसी संस्थान के निदेशक ॥। की नियुक्ति, उसके द्वारा गठित चयन समिति की सिफारिशों पर और सेवा के ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, ऐसी रीति से की जाएगी, जो परिनियमों द्वारा विहित की जाए।

(2) निदेशक, संस्थान का मुख्य शैक्षणिक और कार्यपालक अधिकारी होगा और संस्थान के उचित प्रशासन के लिए तथा शिक्षा प्रदान करने और उसमें अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होगा ।

(3) निदेशक, बोर्ड को वार्षिक रिपोर्ट और लेखा प्रस्तुत करेगा ।

(4) निदेशक ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा, जो इस अधिनियम या परिनियमों या अध्यादेशों द्वारा उसे सौंपे जाएं ।

 [(5) प्रत्येक संस्थान के उपनिदेशक की नियुक्ति, ऐसी रीति में और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर की जाएगी, जो परिनियमों द्वारा अधिकथित की जाएं और वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा या निदेशक द्वारा उसे सौंपे जाएं ।]

18. कुलसचिव-(1) प्रत्येक संस्थान का कुलसचिव ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त किया जाएगा, जो परिनियमों द्वारा अधिकथित की जाएं और वह संस्थान के अभिलेखों, उसकी सामान्य मुद्रा, निधियों और ऐसी अन्य संपत्ति का अभिरक्षक होगा, जो बोर्ड उसके भारसाधन में सौंपे ।

(2) कुलसचिव, बोर्ड, सिनेट और ऐसी समितियों के, सचिव के रूप में कार्य करेगा, जो परिनियमों द्वारा विहित की जाएं ।

(3) कुलसचिव अपने कृत्यों के उचित निर्वहन के लिए निदेशक के प्रति उत्तरदायी होगा ।

(4) कुलसचिव ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा, जो उसे इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा या निदेशक द्वारा सौंपे जाएं ।

19. अन्य प्राधिकारी और अधिकारी-ऊपर वर्णित प्राधिकारियों और अधिकारियों से भिन्न प्राधिकारियों और अधिकारियों की शक्तियां और कर्तव्य परिनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।

20. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान-संस्थान को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा, इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोजन किए जाने के पश्चात् प्रत्येक संस्थान को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी धनराशि का ऐसी रीति से संदाय करेगी जो वह ठीक समझे ।

21. संस्थान की निधि-(1) प्रत्येक संस्थान एक निधि बनाए रखेगा, जिसमें निम्नलिखित धन जमा किए जाएंगेः-

(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी धन;

(ख) संस्थान द्वारा प्राप्त सभी फीस और अन्य प्रभार;

(ग) संस्थान द्वारा अनुदान, दान, संदान, उपकृति, वसीयत या अंतरण के रूप में प्राप्त सभी धन; और

(घ) संस्थान द्वार किसी अन्य रीति या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सभी धन ।

(2) किसी भी संस्थान की निधि में जमा किए गए सभी धन ऐसे बैंकों में जमा किए जाएंगे या ऐसी रीति से विनिहित किए जाएंगे जो संस्थान, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, विनिश्चित करे ।

(3) प्रत्येक संस्थान की निधि का उपयोग संस्थान के व्यय की पूर्ति के लिए किया जाएगा जिसके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन संस्थान की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के निर्वहन में उपगत व्यय भी हैं ।

22. लेखा और संपरीक्षा-(1) प्रत्येक संस्थान, लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अंतर्गत तुलन-पत्र भी है, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए । 

(2) प्रत्येक संस्थान के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा की जाएगी और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय संस्थान द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के और संस्थान के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के, ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, संबंधित वाउचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागजपत्र को पेश किए जाने की मांग करने और संस्थान के कार्यालयों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रत्येक संस्थान के यथाप्रमणित लेखे तद्विषयक संपरीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

23. पेंशन और भविष्य निधि-प्रत्येक संस्थान अपने कर्मचारियों के फायदे के लिए ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन, जो परिनियमों द्वारा विहित की जाएं, ऐसी भविष्य या पेंशन निधि स्थापित करेगा या ऐसी बीमा स्कीम का उपबंध करेगा, जो वह ठीक समझे ।

24. नियुक्तियां-प्रत्येक संस्थान के कर्मचारिवृंद की सभी नियुक्तियां, निदेशक [की नियुक्ति] के सिवाय, परिनियमों में अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार, –

(क) यदि नियुक्ति शैक्षणिक कर्मचारिवृंद में प्राध्यापक या उसके ऊपर के पद पर की जाती है या यदि नियुक्ति अशैक्षणिक कर्मचारिवृंद में किसी ऐसे काडर में की जाती है जिसका अधिकतम वेतनमान दस हजार पांच सौ रुपए से अधिक है, तो बोर्ड द्वारा;

(ख) किसी अन्य दशा में निदेशक द्वारा, की जाएंगी ।

25. परिनियम-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, परिनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) सम्मानिक उपाधियों का प्रदान किया जाना;

(ख) शिक्षण विभागों का बनाया जाना;

(ग) संस्थानों में पाठ्यक्रमों के लिए प्रभार्य फीस और संस्थान की उपाधियों और डिप्लोमाओं की परीक्षाओं में प्रवेश के लिए प्रभार्य फीस;

(घ) अध्येतावृत्तियों, छात्रवृत्तियों, छात्र-सहायता वृत्तियों, पदक और पुरस्कारों का संस्थित किया जाना;

(ङ) संस्थान के अधिकारियों की पदावधि और उनकी नियुक्ति की पद्धति;

(च) संस्थान के शिक्षकों की अर्हताएं;

(छ) संस्थान के शिक्षकों और अन्य कर्मचारिवृंद का वर्गीकरण, नियुक्ति की पद्धति और उनकी सेवा के निबंधनों और शर्तों का अवधारण;

(ज) संस्थान के अधिकारियों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारिवृंद के फायदे के लिए पेंशन, बीमा और भविष्य निधियों की स्थापना;

(झ) संस्थान के प्राधिकरणों का गठन, उनकी शक्तियां और कर्तव्य;

(ञ) छात्र-निवास और छात्रावासों की स्थापना और उनका अनुरक्षण;

(ट) संस्थान के छात्रों के आवास की शर्तें और छात्र-निवासों तथा छात्रावासों में निवास के लिए फीस और अन्य प्रभारों का उद्ग्रहण;

(ठ) बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय भत्ते;

(ड) बोर्ड के आदेशों और विनिश्चयों का अधिप्रमाणन; और

(ढ) बोर्ड, सिनेट या किसी समिति के अधिवेशन, ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति और उनके कामकाज के संचालन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ।

26. परिनियम किस प्रकार बनाए जाएंगे-(1) प्रत्येक संस्थान के प्रथम परिनियम कुलाध्यक्ष के पूर्वानुमोदन से केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएंगे और उनकी एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष यथाशक्य शीघ्र रखी जाएगी ।

(2) बोर्ड, समय-समय पर नया या अतिरिक्त परिनियम बना सकेगा या इस धारा में इसके पश्चात् उपबंधित रीति से परिनियमों को संशोधित या निरसित कर सकेगा ।

(3) प्रत्येक नए परिनियम के लिए या परिनियमों में परिवर्धन या किसी परिनियम के किसी संशोधन या निरसन के लिए कुलाध्यक्ष का पूर्वानुमोदन अपेक्षित होगा । कुलाध्यक्ष उसके लिए अनुमति दे सकता है या अनुमति रोक सकता है या उसे बोर्ड को विचारण के लिए भेज सकता है ।

(4) कोई नया परिनियम या विद्यमान परिनियम को संशोधित या निरसित करने वाला परिनियम तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक कुलाध्यक्ष उसके लिए अनुमति नहीं दे देता है ।

27. अध्यादेश-इस अधिनियम और परिनियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान के अध्यादेशों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) संस्थान में छात्रों का प्रवेश;

(ख) संस्थान की सभी उपाधियों और डिप्लोमाओं के लिए अधिकथित किए जाने वाले पाठ्यक्रम;

(ग) वे शर्तें जिनके अधीन छात्रों को उपाधि तथा डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में और संस्थान की परीक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा और वे उपाधियों तथा डिप्लोमाओं के लिए पात्र होंगे;

(घ) अध्येतावृत्तियों, छात्र-सहायता वृत्तियों, पदक और पुरस्कार प्रदान करने की शर्तें;

(ङ) परीक्षा निकायों, परीक्षकों और अनुसीमकों की नियुक्ति करने की शर्तें और ढंग तथा उनके कर्तव्य;

(च) परीक्षाओं का संचालन;

(छ) संस्थान के छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखना; और

(ज) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम या परिनियमों के अधीन अध्यादेशों द्वारा उपबंधित किए जाने हैं या किए जा सकते हैं ।

28. अध्यादेश किए प्रकार बनाए जाएंगे-(1) इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय अध्यादेश सिनेट द्वारा बनाए जाएंगे ।

(2) सिनेट द्वारा बनाए गए सभी अध्यादेश उस तारीख से प्रभावी होंगे जो वह निर्दिष्ट करे किन्तु इस प्रकार बनाया गया प्रत्येक अध्यादेश बोर्ड को, यथाशक्य शीघ्र, प्रस्तुत किया जाएगा और बोर्ड अपने आगामी अधिवेशन में उस पर विचार करेगा ।

(3) बोर्ड को ऐसा कोई अध्यादेश संकल्प द्वारा उपांतरित या रद्द करने की शक्ति होगी और संकल्प की तारीख से ऐसा अध्यादेश, यथास्थिति, तदनुसार उपांतरित या रद्द हो जाएगा ।

29. माध्यस्थम् अधिकरण-(1) किसी संस्थान और उसके किसी कर्मचारी के बीच संविदा से उद्भूत होने वाला कोई विवाद, संपृक्त कर्मचारी के अनुरोध पर या संस्थान की प्रेरणा पर, माध्यस्थम् अधिकरण को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसमें संस्थान द्वारा नियुक्त एक सदस्य, कर्मचारी द्वारा नामनिर्दिष्ट एक सदस्य और कुलाध्यक्ष द्वारा नियुक्त एक अधिनिर्णायक होगा ।

(2) अधिकरण का विनिश्चय अंतिम होगा और किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

(3) उपधारा (1) द्वारा माध्यस्थम् अधिकरण को निर्देश किए जाने के लिए अपेक्षित किसी मामले की बाबत किसी न्यायालय में कोई वाद या कार्यवाही नहीं होगी ।

(4) माध्यस्थम् अधिकरण को अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी ।

(5) माध्यस्थम् से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की कोई बात इस धारा के अधीन माध्यस्थमों को लागू नहीं होगी ।

अध्याय 3

परिषद्

30. परिषद् की स्थापना-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, [ पहली अनुसूची, दूसरी अनुसूची और तीसरी अनुसूची] के स्तंभ (3) में विनिर्दिष्ट सभी संस्थानों के लिए एक केन्द्रीय निकाय स्थापित किया जाएगा जिसे परिषद् कहा जाएगा ।

(2) परिषद् निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्ः-

(क) केन्द्रीय सरकार में तकनीकी शिक्षा पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले मंत्रालय या विभाग का, भारसाधक मंत्री, पदेन, अध्यक्ष; 

(ख) केन्द्रीय सरकार में तकनीकी शिक्षा पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले मंत्रालय या विभाग का, भारसाधक, भारत सरकार का सचिव, पदेन, उपाध्यक्ष;

(ग) प्रत्येक बोर्ड का अध्यक्ष, पदेन;

(घ) प्रत्येक संस्थान का निदेशक, पदेन;

(ङ) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष, पदेन;

(च) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक, पदेन;

(छ) केन्द्रीय सरकार के ऐसे मंत्रालयों या विभागों का जो जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष से संबंधित हैं, प्रतिनिधित्व करने वाले, भारत सरकार के चार सचिव, पदेन;

(ज) अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, पदेन;

(झ) कुलाध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किए गए कम से कम तीन या अधिक से अधिक पांच व्यक्ति, जिनमें से कम से कम एक महिला होगी जो शिक्षा, उद्योग, विज्ञान या प्रौद्योगिकी का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति होंगे;

(ञ) तीन संसद् सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा से और एक राज्य सभा से चुना जाएगाः

परंतु परिषद् के सदस्य का पद, संसद् के किसी सदन का सदस्य चुने जाने या होने से इसके धारक को निरर्हित नहीं करेगा;  

(ट) उस सरकार के, जहां संस्थान अवस्थित है, तकनीकी शिक्षा से संबधित मंत्रालय या विभागों के राज्य सरकार के दो सचिव, पदेन;

(ठ) मानव संसाधन विकास मंत्रालय या केन्द्रीय सरकार के विभाग से संबंधित वित्त सलाहकार, पदेन;

(ड) केन्द्रीय सरकार के ऐसे मंत्रालय या विभाग का जो तकनीकी शिक्षा पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है, भारत सरकार के संयुक्त सचिव से अन्यून की पंक्ति का एक अधिकारी, पदेन, सदस्य सचिव ।

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।

31. परिषद् के सदस्यों की पदावधि, रिक्तियां और उन्हें संदेय भत्ते-(1) किसी सदस्य की पदावधि, अधिसूचना की तारीख से तीन वर्ष होगीः

परंतु पदेन सदस्य की पदावधि तब तक रहेगी जब तक वह उस पद को धारण करता है जिसके आधार पर वह सदस्य है ।

(2) धारा 30 की उपधारा (2) के खंड (ञ) ॥। के अधीन निर्वाचित सदस्य की पदावधि, उसके उस सदन का, जिसने उसे निर्वाचित किया था, सदस्य न रहने पर, तत्काल समाप्त हो जाएगी ।

(3) किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए किसी नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित सदस्य की पदावधि उस सदस्य की पदावधि के शेष भाग तक होगी जिसके स्थान पर वह नियुक्त किया गया है ।

(4) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, पदावरोही सदस्य केन्द्रीय सरकार द्वारा, अन्यथा निदेश न दिए जाने की दशा में तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक कोई अन्य व्यक्ति उसके स्थान पर सदस्य के रूप में नियुक्त नहीं कर दिया जाता है ।

(5) पदेन सदस्यों से भिन्न, परिषद् के सदस्यों को ऐसे यात्रा और अन्य भत्ते संदत्त किए जाएंगे जो विहित किए जाएं ।

32. परिषद् के कृत्य-(1) परिषद् का यह साधारण कर्तव्य होगा कि वह सभी संस्थानों के क्रियाकलापों का समन्वय करे ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, परिषद् निम्नलिखित कृत्य करेगी, अर्थात्ः-

(क) पाठ्यक्रमों की अवधि, संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली उपाधियों और अन्य विद्या संबंधी विशिष्ट उपाधियों, प्रवेश स्तर और अन्य शैक्षिक विषयों से संबंधित बातों पर सलाह देना;

(ख) कर्मचारियों के काडर, उनकी भर्ती के ढंग और सेवा की शर्तें, छात्रवृत्तियां देने और फीस माफ करने, फीस के उद्ग्रहण और समान हित के अन्य मामलों के बारे में नीति अधिकथित करना;

(ग) प्रत्येक संस्थान की विकास योजनाओं की जांच करना और उनमें से ऐसी योजनाओं का अनुमोदन करना जो आवश्यक समझी जाएं और ऐसी अनुमोदित योजनाओं के वित्तीय परिणामों को भी मोटे तौर से उपदर्शित करना;

(घ) कुलाध्यक्ष को, इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा किए जाने वाले किसी कृत्य के संबंध में, उस दशा में सलाह देना जिसमें ऐसी अपेक्षा की जाए; और

(ङ) ऐसे अन्य कृत्यों को करना जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको सोंपे जाएं ।

33. परिषद् का अध्यक्ष-(1) परिषद् का अध्यक्ष परिषद् की बैठक की सामान्यतया अध्यक्षता करेगाः

परंतु उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष परिषद् की बैठक की अध्यक्षता करेगा । 

(2) परिषद् के अध्यक्ष का यह कर्तव्य होगा कि वह यह सुनिश्चित करे कि परिषद् द्वारा किए गए विनिश्चय क्रियान्वित किए गए हैं ।

(3) अध्यक्ष ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो उस इस अधिनियम द्वारा सौंपे गए हैं ।

(4) परिषद्, प्रत्येक वर्ष में एक बार अपनी बैठक करेगी और अपनी बैठक में ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगी जो विहित की जाए ।

34. इस अध्याय के विषयों के बारे में नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 31 की उपधारा (5) के अधीन परिषद् के सदस्यों को संदेय यात्रा और अन्य भत्ते; और

(ख) धारा 33 की उपधारा (4) के अधीन परिषद् की बैठक में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ।

(3) इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

अध्याय 4

प्रकीर्ण

35. रिक्तियों आदि के कारण कार्यों और कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-इस अधिनियम या परिनियमों के अधीन गठित परिषद् या किसी संस्थान या बोर्ड या सिनेट या किसी अन्य निकाय का कोई कार्य निम्नलिखित कारणों से अविधिमान्य नहीं होगा: –

(क) उसमें कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या

(ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के निर्वाचन, नामनिर्देशन या नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या

(ग) उसकी प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणागुण को प्रभावित नहीं करती है ।

36. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसा उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो और जो कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होः 

परन्तु ऐसा कोई आदेश उस तारीख से, जिसको यह अधिनियम, राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करता है, दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

37. संक्रमणकालीन उपबंध-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी-

(क) इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पहले [पहली अनुसूची में वर्णित] प्रत्येक संस्थान के शासक बोर्ड के रूप में कार्य करने वाला शासक बोर्ड उसी रूप में तब तक कार्य करता रहेगा जब तक इस अधिनियम के अधीन उस संस्थान के लिए कोई नया बोर्ड गठित नहीं कर दिया जाता है, किन्तु इस अधिनियम के अधीन नए बोर्ड के गठन पर बोर्ड के ऐसे सदस्य, जो ऐसे गठन के पहले पद धारण कर रहे हों, पद धारण नहीं करेंगे;

(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व, प्रत्येक संस्थान के संबंध में गठित प्रत्येक सिनेट को, इस अधिनियम के अधीन गठित सिनेट तब तक समझा जाएगा जब तक कि उस संस्थान के लिए इस अधिनियम के अधीन नई सिनेट गठित नहीं की जाती है, किन्तु ऐसे गठन से पहले पद धारण करने वाले सिनेट के सदस्य पद धारण नहीं करेंगे ।

1[(ग) ऐसी भर्ती प्रक्रिया और अनुशासनिक कार्यवाहियां, जो राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रारंभ से पूर्व प्रारंभ हुई थीं, ऐसे प्रारंभ से ठीक पूर्व प्रवृत्त सुसंगत उपबंधों के अनुसार, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, पूरी की जाएंगी ।

स्पष्टीकरण-किसी पद के लिए भर्ती प्रक्रिया, उस पद के लिए आवेदन आमंत्रित करने संबंधी विज्ञापन के प्रकाशन की तारीख से प्रारंभ हुई मानी जा सकेगी और संस्थान के किसी कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाहियां उस कर्मचारी को बड़ी शास्ति के लिए आरोप पत्र या लघु शास्ति के लिए हेतुक दर्शित करने की सूचना के जारी किए जाने की तारीख से प्रारंभ हुई मानी जा सकेंगी;

(घ) ऐसे सभी विषय, जिनके लिए क्रमशः धारा 25 और धारा 27 के अधीन परिनियमों और अध्यादेशों के माध्यम से उपबंधित किया जाना आशयित है, ऐसे परिनियमों और अध्यादेशों के बनाए जाने तक, इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व प्रवृत्त तत्स्थानी उपबंधों द्वारा, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, शासित होंगे;

 [(ङ) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से ठीक पूर्व बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर की उस रूप में कृत्य कर रही सभा, विद्या परिषद् और कार्यकारी परिषद् तब तक कृत्य करना जारी रखेंगी जब तक कि भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर के लिए इस अधिनियम के अधीन नए बोर्ड का गठन नहीं कर दिया जाता है किंतु इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के गठन पर या उसके पश्चात् सभा, विद्या परिषद् और कार्यकारी परिषद् के सदस्य पद पर नहीं रहेंगे;

(च) बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के प्राधिकारी, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों, जो राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से पूर्व उस रूप में कृत्य कर रहे हैं, तब तक कृत्य करना जारी रखेंगे, जब तक कि इस अधिनियम के अधीन उन्हीं कृत्यों का पालन करने के लिए नए प्राधिकारी की नियुक्ति या गठन नहीं कर दिया जाता है, किंतु ऐसी नियुक्ति या गठन पर और उसके पश्चात् बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर अधिनियम, 2004 (2004 का 13) या तद्धीन बनाए गए किन्हीं परिनियमों या अध्यादेशों के अधीन कृत्य कर रहे प्राधिकारी पद पर नहीं रहेंगे;

(छ) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ होने से पूर्व प्रत्येक संस्थान के संबंध में गठित प्रत्येक सिनेट या किसी अन्य प्राधिकारी के नाम से ज्ञात सिनेट तब तक उक्त अधिनियम के अधीन गठित सिनेट समझी जाएगी जब तक कि संस्थान के लिए इस अधिनियम के अधीन नई सिनेट का गठन नहीं कर दिया जाता है किंतु इस अधिनियम के अधीन नई सिनेट के गठन पर ऐसे गठन से पूर्व पद धारण करने वाले सिनेट के सदस्य अपने पद पर नहीं रहेंगे;

(ज) जब तक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2014 के अधीन पहले परिनियम और अध्यादेश नहीं बनाए जाते हैं और प्रवर्तन में नहीं लाए जाते हैं उक्त अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पूर्व बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुर के लिए बनाए गए परिनियम, अध्यादेश और नियमों का भारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर को लागू होना तब तक जारी रहेगा जब तक कि वे उक्त अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं ।]

[पहली अनुसूची]

[धारा 3 (छ), (ड) और धारा 4 (1) देखिए]

इस अधिनियम में सम्मिलित किए गए केन्द्रीय संस्थानों की सूची

क्रमसं०सोसाइटीतत्समानसंस्थान
(1)(2)(3)
1.मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद सोसाइटीमोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद
2.मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल सोसाइटीमौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल ।
3.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट ।
4.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्गापुर सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्गापुर ।
5.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर ।
6.मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर सोसाइटीमालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर ।
7.डा० बी० आर० अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर सोसाइटीडा० बी० आर० अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर ।
8.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर ।
9.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ।
10.विश्वेस्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर सोसाइटीविश्वेस्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर ।
11.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना ।
12.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला ।
13.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सिलचर सोसाइटी  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सिलचर ।
14.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, श्रीनगर सोसाइटी   राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, श्रीनगर ।
15.सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत सोसाइटीसरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत ।
16.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कर्नाटक, सूरथकल सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कर्नाटक, सूरथकल ।
17.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली ।
18.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल ।
19.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर ।
20.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला सोसाइटीराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला ।
[21.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गोवा सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गोवा ।
22.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पुडुचेरी सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पुडुचेरी ।
23.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली ।
24.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सुमेरी (श्रीनगर), उत्तराखंड सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तराखंड ।
25.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सोहरा (मेघालय) सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मेघालय ।
26.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मिजोरम सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मिजोरम ।
27.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर ।
28.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागालैंड सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्राद्यौगिकी संस्थान, नागालैंड ।
29.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अरुणाचल प्रदेश सोसाइटी ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अरुणाचल प्रदेश ।
30.राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सिक्किम ।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सिक्किम ।]

[दूसरी अनुसूची

[धारा 3(छ), (ड), धारा 4(1) और धारा 11देखिए]

भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की सूची

क्रम सं०सोसाइटीतत्समान संस्थान
(1)(2)(3)
1.भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, कोलकाता सोसाइटी ।भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, कोलकाता ।
2.भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, पूणे सोसाइटी ।भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, पूणे ।
3.भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, मोहाली सोसाइटी । भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, मोहाली ।
4.भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, भोपाल सोसाइटी ।भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, भोपाल ।
5.भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम सोसाइटी ।भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम ।]

[तीसरी अनुसूची

[धारा (छ), (ट), (ड), धारा 4(1) और धारा 11देखिए]

राष्ट्रीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों की सूची

क्रमसं०विश्वविद्यालययासोसाइटीतत्स्थानीसंस्थान
(1)(2)(3)
1.बंगाल इंजीनियरी और विज्ञान विश्वविद्यालय, शिवपुरभारतीय इंजीनियरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर ।]
Note : सभी तरह के एक्ट देखने और समझकर सरल माध्यम से समझाने लिए IPC का सहारा लिया गया है और आप भी भारतीय न्याय व्यवस्था में अपना भरोसा बनाकर इन्हें पढ़े और ज्यादा बेहतर समझ के लिए किसी अच्छे वकील से संपर्क करें. यदि आपको कोई त्रुटी मिले तो comment करके हमें बताये हम जुरूर सुधारने का प्रयास करेंगे. आर्टिकल या पोस्ट में लिखी किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे.

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